ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल में भारत की यात्रा पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नये आयाम दिये हैं। यह यात्रा जुलाई में पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा के बाद हुई है, जहां दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। स्टार्मर, जो उद्योग जगत के बड़े नामों के साथ भारत आए, ने नई दिल्ली के साथ साझेदारी को ग्रोथ का लॉन्चपैड बताया, जबकि पीएम मोदी ने ब्रिटेन को स्वाभाविक साझेदार कहा। यह मुलाकात दो महीने पहले हुए विस्तृत आर्थिक और व्यापार समझौते को जल्द लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके लिए एक जॉइंट कमिटी बनाने का ऐलान किया गया है।
इस व्यापार समझौते से दोनों देशों को जबरदस्त फायदा होने की उम्मीद है। ब्रिटेन से भारत आने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो जाएगा, वहीं भारत से ब्रिटेन निर्यात होने वाले 99 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस डील से व्यापारियों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा, साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 56 अरब डॉलर का व्यापार है, जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह सहयोग ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, अमेरिकी टैरिफ के कारण दबाव में है। आशंका है कि चीन और बांग्लादेश पर कम टैरिफ के कारण भारत के टेक्सटाइल निर्यात में अगले साल 10′ तक की गिरावट आ सकती है। ब्रिटेन के साथ हुई यह डील इस संभावित नुकसान को कम करने में मददगार साबित होगी।
स्टार्मर के दौरे ने टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, शिक्षा, निवेश, स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। एक बड़ी घोषणा यह है कि ब्रिटेन के 9 विश्वविद्यालय अब भारत में अपने कैंपस खोल सकेंगे। यह उन भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो अमेरिका की वीजा नीतियों के कारण विदेश में पढ़ाई के अवसरों को लेकर चिंतित थे। अपने ही देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मिलने से रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी और स्टार्मर दोनों ही इन द्विपक्षीय समझौतों को ऐतिहासिक मान रहे हैं, जिसका मुख्य कारण मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां हैं। अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच, इन मुलाकातों ने दोनों देशों को नए विकल्प दिए हैं। ये नए विकल्प उन्हें अमेरिका के साथ बातचीत करते समय एक मजबूत स्थिति प्रदान करेंगे।
यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत करेगी। यह दिखाता है कि कैसे देश आपसी सहयोग से वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और अपने नागरिकों के लिए बेहतर अवसर पैदा कर सकते हैं। इस तरह की साझेदारी भविष्य में और भी मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है, और यह निश्चित तौर पर दोनों देशों के लिए फायदेमंद ही साबित होगी। साथ ही हम अमेरिका, चीन को यह भी बता सकेंगे कि हमारे लिए विकल्पों की कमी नहीं है।
संजय सक्सेना
Editorial
ब्रिटिश पीएम की यात्रा
