भोपाल। राज्य सरकार ने करीब आठ माह बाद मध्य प्रदेश में सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी की नियुक्ति कर दी है। इस नियुक्ति की पिछले एक सप्ताह से चर्चा चल रही थी, जिसके आदेश अब जारी कर दिए गए हैं। लंबे समय से प्राधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण प्रदेशभर में सहकारी समितियों के चुनाव प्रभावित हो रहे थे और हजारों फाइलें लंबित पड़ी थीं।
सहकारिता विभाग ने मध्य प्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत सेवानिवृत्त सचिव संजय गुप्ता को मध्य प्रदेश सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी नियुक्त किया है। जारी आदेश के अनुसार वे अब प्रदेश में सहकारी समितियों के चुनाव संबंधी प्रक्रिया का संचालन करेंगे।
सीएम के करीबी माने जाते हैं गुप्ता
संजय गुप्ता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करीबी और भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे रिटायरमेंट से पहले उज्जैन संभागायुक्त के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। गुप्ता गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस पद पर प्रमोट हुए अधिकारियों में शामिल रहे हैं।
सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय के अनुसार सितंबर 2025 में तत्कालीन निर्वाचन प्राधिकारी एमबी ओझा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद खाली पड़ा था। इसके चलते गृह निर्माण सहकारी समिति, साख सहकारी समिति, कृषि विपणन सहकारी समिति, दुग्ध सहकारी समिति समेत विभिन्न सहकारी संस्थाओं के चुनाव पूरी तरह ठप हो गए थे।
600 से अधिक फाइलें लंबित
स्थिति यह थी कि अकेले सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय में 600 से अधिक फाइलें लंबित थीं, जबकि जिलों से आने वाले प्रस्तावों को भी उप पंजीयक सहकारिता स्तर पर रोक दिया गया था। अधिकारियों का कहना था कि जब निर्वाचन प्राधिकारी ही नियुक्त नहीं हैं तो चुनाव प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ाई जाए।
नियुक्ति के बाद अब प्रदेशभर में सहकारी समितियों के चुनावी कार्यों में तेजी आने की संभावना है। मतदाता सूची के प्रकाशन, दावों-आपत्तियों की जांच और अन्य प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराए जा सकेंगे। इससे लंबे समय से रुकी सहकारी संस्थाओं की प्रशासनिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
रिटायर्ड आईएएस संजय गुप्ता बने सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी
