कौन हैं भारतीय मूल के अरुण सुब्रमण्यम? जिन्‍होंने ट्रंप का फैसला रोका, मस्‍क ने बताया जज के भेष में एक्टिविस्ट

न्यू यार्क। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ट्रंप प्रशासन और न्यायपालिका के बीच तलवारें खिंच गई हैं. भारतीय मूल के संघीय जज अरुण सुब्रमण्यम ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने न केवल व्हाइट हाउस को हिला दिया है बल्कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क को भी मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया है. मामला चाइल्ड केयर और सोशल सर्विसेज के 10 बिलियन डॉलर (करीब 840 अरब रुपये) के फंड को फ्रीज करने से जुड़ा है जिस पर जज ने फिलहाल रोक लगा दी है.

ट्रंप प्रशासन ने न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया जैसे पांच डेमोक्रेट शासित राज्यों को दिए जाने वाले इस फंड को यह कहकर रोक दिया था कि इसमें भारी धोखाधड़ी हो रही है. प्रशासन का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल अवैध प्रवासियों के लिए किया जा रहा है. लेकिन बाइडन द्वारा नियुक्त जज सुब्रमण्यम ने ट्रंप सरकार के इस आदेश पर 14 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी.उन्होंने तर्क दिया कि फंड रोकने से गरीब परिवारों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा और फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है.

इस फैसले के बाद एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोर्चा खोल दिया. मस्क ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा, “अगर हाउस, सीनेट और प्रेसीडेंसी पर रिपब्लिकन का नियंत्रण होने के बावजूद वोटर्स नतीजों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं तो हम लोकतांत्रिक शासन में नहीं रह रहे हैं.” उन्होंने जज सुब्रमण्यम को जज के भेष में एक्टिविस्ट’ करार देते हुए उन पर धोखाधड़ी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. मस्क के साथ-साथ फॉक्स न्यूज की एंकर लॉरा इंग्राहम ने भी जज को रेजिस्टेंस का हिस्सा बताया. रिपब्लिकन समर्थकों का कहना है कि एक अकेला जज पूरे प्रशासन की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को नहीं रोक सकता. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि संघीय अदालतों को कार्यपालिका को फंड जारी करने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है, खासकर तब जब मामला टैक्सपेयर्स के पैसे के दुरुपयोग से जुड़ा हो।

कानूनी लड़ाई और गरीबों का हवाला
दूसरी तरफ, न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने ट्रंप सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया. जेम्स के अनुसार, फंड रोकने से घरेलू हिंसा आश्रय केंद्रों और कम आय वाले परिवारों को भारी नुकसान होता. स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) के डिप्टी सेक्रेटरी जिम ओ’नील ने कहा है कि वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे, लेकिन इसके खिलाफ अपील जरूर करेंगे. ट्रंप प्रशासन का साफ कहना है कि वे बिना पूरी जांच और रसीदें देखे एक भी डॉलर जारी नहीं करना चाहते. अब 14 दिनों बाद अदालत इस पर लंबी रोक लगाने पर विचार करेगी. तब तक अमेरिका में न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका की यह जंग और भी दिलचस्प होने वाली है.

कौन हैं जज अरुण सुब्रमण्यम?
अरुण सुब्रमण्यम न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए पहले भारतीय-अमेरिकी संघीय जज हैं. 2023 में राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा नियुक्त किए गए सुब्रमण्यम को उनकी निष्पक्षता और कानून की गहरी समझ के लिए जाना जाता है. जज बनने से पहले, वह एक प्रसिद्ध वकील थे जिन्होंने उपभोक्ता संरक्षण और मानवाधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रूथ बेडर गिंसबर्ग के तहत क्लर्क के रूप में भी कार्य किया है. अरुण सुब्रमण्यम का जन्म 1979 में अमेरिका के ओहियो (Ohio) राज्य के क्लीवलैंड में हुआ था. उनके माता-पिता 1970 के दशक की शुरुआत में भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे. उनके पिता एक कंट्रोलर के रूप में काम करते थे और उनकी माता ने कई जगहों पर बुककीपर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. वह एक मध्यमवर्गीय भारतीय प्रवासी परिवार में पले-बढ़े.

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