नई दिल्ली। सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर नीदरलैंड के हेग में हो रही परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) की कार्यवाहियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, कोर्ट पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा फैसला देने की तैयारी में है, जिसका भारत लगातार बहिष्कार करता आया है।
भारत कर रहा सिंधु जल संधि पर सुनवाई का बहिष्कार
भारत ने फास्ट ट्रैक सुनवाई को लगातार अवैध बताया है। वहीं, PCA भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने की कानूनी वैधता पर विचार करने और पाकिस्तान की अपील पर अंतरिम राहत दे सकता है।
हेग कोर्ट ने एक के बाद एक दो फैसले दिए थे। एक 12 मार्च को और दूसरा 21 मार्च को। भारत संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहता आया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक कि पाकिस्तान आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद नहीं कर देता।
भारत को रुख साफ करने के लिए मिली थी 30 मार्च की समयसीमा
वहीं, भारत को पीसीएक की अवैधता पर अपना रुख साफ करने के लिए 30 मार्च तक की समयसीमा मिली थी। 21 मार्च को अपने पहले ऑर्डर में पीसीए ने कहा था कि वह अगली सुनवाई वह अंतरिम राहत के उपायों, संधि विशेष को लेकर अंतरिम उपाय अपील और संधि के स्टेटस एप्लीकेशन पर करने वाला है।
हेग की अदालत अगली सुनवाई में क्या कर सकती है
इसका मतलब यह था कि PCA सिंधु जल संधि पर भारत की ओर से एकतरफा निलंबन के मेरिट और पाकिस्तान के अंतरिम उपायों के आवेदन पर विचार करेगा। इसमें जम्मू-कश्मीर में रैटल और किशनगंगा प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य को रोकने की बात भी थी।
भारत के पास 30 मार्च तक पीसीए के जवाब देने और कार्यवाहियों में हिस्सा लेने की समयसीमा थी। मगर, भारत ने पीसीए को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया।
अप्रैल के आखिर में हो सकती है इस मामले में आखिरी सुनवाई
PCA ने भारत की कार्यवाहियों से गैरमौजूदगी को लेकर अपना शेड्यूल जारी किया है। इसने 12 मार्च को दिए अपने आदेश में कहा था कि 13 अप्रैल से पहले अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति के चरण की सुनवाई में अगर भारत कोर्ट को अपना इरादा नहीं बताता है या सूचना नहीं देता है तो पाकिस्तान अपना मेमोरियल फाइल कर सकेगा।
ऐसे में एक मौखिक सुनवाई हेग के पीस पैलेस में 26 से 28 अप्रैल तक होगी। वहीं, दूसरे आदेश में PCA ने प्रक्रियात्मक आदेश दिया था, जिसमें पाकिस्तान को पॉन्डेज लॉन्गबुक्स दाखिल करने की अनुमति दी थी।
