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MP: हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा..’ के क्या हैं मायने..? आखिर दिल्ली क्यों नहीं गए शिवराज?

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव नतीजों के बाद दिल्ली न जाकर विधानसभा चुनाव में हारी हुई सीटों पर फोकस कर रहे हैं। यहां लाड़ली बहना सम्मेलन का आयोजन कर बहनों को जीत का क्रेडिट दे रहे हैं। श्योपुर में उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच अटलजी की कविता ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…’ सुनाकर केंद्रीय नेतृत्व को भी उलझन में डालने का प्रयास किया है।

 सवाल उठ रहा है कि आखिर शिवराज दिल्ली क्यों नहीं गए? क्या यहीं से हाई कमान को चुनौती तो नहीं दे रहे हैं? यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि क्या राजनीतिक बिसात पर शिवराज कोई गहरी चाल चल रहे हैं?

असल में ‘शिवराज हारी हुई सीटों पर दौरे कर अपनी पोजिशनिंग कर रहे हैं। वे ये भी जता रहे हैं कि इस जीत में उनकी योजनाओं का अहम रोल रहा है।’

शिवराज 7 दिसंबर को श्योपुर में लाड़ली बहना सम्मेलन में पहुंचे। बीजेपी कार्यकर्ता सम्मेलन में भी शामिल हुए। दोनों कार्यक्रमों में उन्होंने कई बातें कहीं..

जीत लाड़ली बहनों को समर्पित – मैं कार्यकर्ताओं की मेहनत को प्रणाम करने आया हूं। कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण ही भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 163 सीटें जीती हैं। ये ऐतिहासिक जीत, मैं कार्यकर्ताओं और लाड़ली बहनों को समर्पित करता हूं।

मैं तुम्हारा हूं और तुम्हारे लिए खड़ा हूं- सभी कार्यकर्ता एक बार फिर आत्मविश्वास के साथ खड़े हो जाएं। 2024 में प्रदेश की 29 में से 29 सीटें जिताकर मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाएंगे। मैं वचन देने आया हूं कि मैं तुम्हारा हूं और तुम्हारे लिए खड़ा हूं।

हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा

 अटल जी ने कहा था कि हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा… काल के कपाल पर लिखता हूं, मिटाता हूं… गीत नया गाता हूं-गीत नया गाता हूं…। अब नया गीत है- श्योपुर जिले से विधानसभा में हम भले नहीं जीते लेकिन लोकसभा में दोनों विधानसभा क्षेत्रों से भारी बहुमत से पार्टी को जिताएंगे। (शिवराज ने यह बात श्योपुर की हारी हुई सीटों के संदर्भ में कही थी।)

भाजपा के एक-एक संकल्प को पूरा किया जाएगा- पहले एक हजार रुपए, फिर 1250 रुपए लाड़ली बहनों के खाते में आए और अब आगे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाते हुए इस राशि को 3000 रुपए तक किया जाएगा। अब बहनों को लखपति बनाने का संकल्प है। भाजपा के एक-एक संकल्प को पूरा किया जाएगा। भाजपा अपनी सभी गारंटियों को पूरा करेगी।

शिवराज ने जाहिर कर दिया कि वे लोकसभा की तैयारी में जुट गए हैं। वे जानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के दिमाग में अभी सिर्फ और सिर्फ लोकसभा चुनाव है। राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं, शिवराज दिल्ली पहुंचकर सीएम पद पर अपनी दावेदारी पेश नहीं करना चाहते। वे जानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व का सबसे ज्यादा फोकस लोकसभा चुनाव जीतने पर है। ऐसे में वे अगले मिशन में जुट गए हैं। इससे वे दिल्ली को ये जताना चाहते हैं कि आपके एजेंडे पर मैंने काम शुरू कर दिया है।

अब तक दिल्ली नहीं जाने और इसके मार्फत क्या संदेश देना चाहते हैं, जानकार कहते हैं, वे यहीं रहकर डिप्लोमेसी से ये काम करना चाहते हैं। जानते हैं कि भाजपा में दावेदारी का कोई मतलब नहीं है। होना वही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में है। फिलहाल तो यही लग रहा है लेकिन वे खुलकर नहीं बोल सकते। वे जानते हैं कि इस प्रचंड जीत के बाद शिवराज को हाशिए पर धकेलने का खतरा पार्टी भी नहीं लेना चाहेगी। लेकिन वे हाईकमान को खुली चुनौती नहीं दे रहे हैं। वे जानते हैं कि इस समय यदि वे पीछे हटे तो हाशिए पर चले जाएंगे। इसलिए अपनी बात कहने के लिए शिवराज अपनी स्टाइल की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। देखना होगा कि इस पॉलिटिक्स का क्या असर होता है। 

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