Indore में दूषित पेयजल से मौतों का मामला फिर गूँजा विधानसभा में…भागीरथपुरा की घटना, इंदौर के लिए कलंकः विजयवर्गीय

भोपाल। विधानसभा में आज फिर इंदौर में दूषित पेयजल से मौतों का मामला गूंजा लेता प्रतिपक्षा उमंग सिंघार द्वारा लाए गए स्थगना प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा के दौरान नगरीया प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवीय ने भगीरथपुरा मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भगीरथपुरा की घटना इंदौर के लिए दुखद और अमग्लानि वाली है। उन्होंने माना कि पहले शिकायत की गई थी और इस मामले में देरी हुई। उन्होंने बताया कि जांच के लिए कमेटी बनाई गई जिसमें कुछ अधिकारी दोषी पाए गए और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
विजयवर्गीय ने कहा-इंदौर मेरी रग-रग में बसता है। मैं इंदौर को केवल शहर नहीं, बल्कि अपनी मां के समान मानता हूं। जब इंदौर की बदनामी होती है तो अंदर तक चोट पहुंचती है कि इंदौर लगातार में नंबर एक रहा है और यहाँ स्वच्छता को संस्कार का रूप दिया गया है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने में इंदौर का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
उन्होंने कहा कि, यह 90 साल पुरानी बस्ती है, जो मुंबई के धारावी का छोटा स्वरूप है। यहां अशिक्षित लोग रहते हैं, जहां काम करना नगर निगम कर्मचारियों के लिए मुश्किल होता है। इसी कारण नगर निगम के कर्मचारी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने माना कि नागरिकों ने पहले शिकायत की थी। इस मामले में देरी हुई। महापौर ने टेंडर जारी किए थे, लेकिन काम समय पर शुरू नहीं हो पाया। जांच के लिए कमेटी बनाई गई, जिसमें कुछ अधिकारी दोषी पाए गए। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यह घटना इंदौर के लिए कलंक के समान है, जबकि इंदौर लगातार स्वच्छता में नंबर एक रहा है। यहां स्वच्छता को संस्कार का रूप दिया गया है।
सिंघार बोले- लोगों को काला पानी पिलाया जा रहा
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोगों को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को जवाब देना चाहिए, लेकिन सरकार जवाब नहीं दे रही है। काला पानी की सजा तो सुनी है, लेकिन यहां तो लोगों को काला पानी पिलाया जा रहा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि विपक्ष ने इस मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग की।
नियम 55 में स्पष्ट है, चर्चा हो सकती है– नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अध्यक्ष महोदय विद्वान हैं और नियम 55 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद उस पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चार–पांच लाख रुपये का मुआवजा कब दिया जाएगा, इस पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। जयवर्धन सिंह द्वारा उठाए गए 20 से 32 मौतों के अलग-अलग आंकड़ों पर भी चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसका कोर्ट से कोई संबंध नहीं है। साथ ही 2019 की पॉल्यूशन कंट्रोल रिपोर्ट के अलर्ट पर भी चर्चा की जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या स्वच्छ पानी के मुद्दे पर भी चर्चा नहीं हो सकती?
स्पीकर का निर्णय, कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है
स्पीकर ने कहा कि सदन की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। ध्यानाकर्षण और बजट पर चर्चा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद ही यह व्यवस्था दी गई है और विषय को ग्रहण नहीं किया गया है।
जयवर्धन बोले- सरकार के जवाब में पहले पेज पर 20 मौतें लिखीं, परिशिष्ट में 32 की लिस्ट दी
जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला नैतिकता से जुड़ा है। जब भी किसी पुरस्कार की बात होती है तो नेता सामने आ जाते हैं, लेकिन जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो अधिकारियों को आगे कर दिया जाता है और मंत्री या महापौर पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थगन को स्वीकार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज ही उन्होंने मंत्री से पूछा था कि भागीरथपुरा प्रकरण में अब तक कितनी मौतें हुई हैं। जवाब के पहले पेज पर 20 का आंकड़ा दिया गया है, जबकि परिशिष्ट में 32 मौतें दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि 6 फरवरी 2026 तक 32 मौतों का उल्लेख उसी उत्तर के परिशिष्ट में है। ऐसे में प्रमुख पेज पर 20 का आंकड़ा देना त्रुटिपूर्ण है और इस पर चर्चा होनी चाहिए कि सही आंकड़ा क्यों नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ 20 लोगों को मुआवजा मिला है। बाकी मृतकों के परिजनों को सहायता कब दी जाएगी? मुख्यमंत्री ने 4 लाख रुपए की सहायता की घोषणा की थी, वह कब तक मिलेगी? इन सभी बातों की तारीख तय होनी चाहिए और इस पर चर्चा होनी चाहिए।
भागीरथपुरा के स्थगन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं, विपक्ष का प्रदर्शन
कटारे ने कहा कि लखन घनघोरिया द्वारा सदन में दिखाई गई अलग-अलग रंगों की पानी की बोतलों को देखकर भी अगर किसी का दिल नहीं पसीज रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि हर ग्राम पंचायत और शहर के हर वार्ड में मौतें हो रही हैं, तो क्या इस मौन स्थिति पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? कटारे ने कहा कि वे जनता के विश्वास के आधार पर सदन में पहुंचे हैं। ऐसे में जनता के मुद्दों पर चर्चा करना उनका दायित्व है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वे भिंड की जनता के प्रभावित होने या किसी घटना के इंतजार के बाद ही चर्चा करें? क्या तब जाकर यह विषय महत्वपूर्ण माना जाएगा? हालांकि भागीरथपुरा के स्थगन प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मंजूरी नहीं दी। कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में प्रदर्शन किया।





