ये तो दुनिया का नौंवा अजूबा लग रहा है कि मधु किश्वर जो एक प्रचंड मोदी और बीजेपी समर्थक मानी जाती हैं, जिन्होंने नरेंद्र मोदी की बायोग्राफ़ी मोदीनामा लिखी है वो आज कुछ अलग ही रंग में सुब्रमण्यम स्वामी के आरोप को रिट्वीट करये हुए नरेंद्र मोदी के निजी जीवन की कारगुज़ारी का बखिया उधेड़ रही हैं जिसका हिंदी अनुवाद नीचे है :
“इसी वजह से मैंने मई 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद से उनसे सेफ दूरी बनाए रखी। मैं उन्हें उन पर लिखी अपनी किताब की एक कॉपी गिफ्ट करने भी नहीं गयी। बस उनके पसंदीदा ब्यूरोक्रेट भरत लाल के ज़रिए एक बिना साइन की हुई कॉपी भेज दी!
मोदी ने जिन महिलाओं को अपने करीबी होने की वजह से MP और मंत्री बनाया था, उनके नाम शुरू से ही संघी पावर नेटवर्क में काफी जोर-शोर से फुसफुसा रहे थे। इसीलिए मैंने बहुत पहले ही सावधानी बरती।
हरदीप पुरी जैसे लोगों के नाम, जिन्होंने गुजरात के CM रहते हुए उन्हें खास सर्विस दी थी, वे भी दबी जुबान में बताए जाने लगे, जैसे ही हरदीप और जयशंकर को कैबिनेट में शामिल किया गया!
2014 में, जब मैं अमेरिका लेक्चर देने गयी, तो वहां भी उनकी अय्याशी के किस्से घूम रहे थे।
12वीं पास स्मृति ईरानी को एजुकेशन मिनिस्टर बनाने से दूसरे स्कैंडल्स को हवा मिली, जो तब तक लोगों की नज़रों से छिपे हुए थे।
मानसी सोनी वाला स्कैंडल पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका था। मोदी के किसी करीबी ने मुझे सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए कागज़ों का पूरा सेट दिया, जो जेल में बंद IAS ऑफिसर ने जमा किया था, जो सोनी के साथ मज़े कर रहा था।
इसके अलावा, गुजरात के लोगों ने, जिनमें मोदी के कुछ करीबी भी शामिल थे, मेरे साथ गुजरात के CM रहते हुए महिलाओं के साथ उनके बुरे रिश्तों की घिनौनी कहानियाँ शेयर कीं। और उससे पहले, जब वे प्रचारक और BJP के पदाधिकारी थे।
उन कहानियों को सुनकर, मुझे उनकी मौजूदगी से इतनी नफ़रत हो गई थी कि मैं उन कार्यक्रमों से भी दूर रहने लगी थी जिनमें शादी के रिसेप्शन भी शामिल थे जहाँ मोदी के आने की संभावना होती थी।
उन खौफ़नाक किस्सों से मैं इतना ज़्यादा सदमे में आ गयी थी कि 2014 में मैं सचमुच गहरे डिप्रेशन में चला गयी, जिसका मेरी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ा। कई सदमों से उबरने की उम्मीद में, 2015 में मैं 21 दिनों के लिए कोयंबटूर के एक आयुर्वेदिक इलाज केंद्र में गयी।
मुझे याद है, जब मैंने RSS के एक बहुत बड़े बुद्धिजीवी के साथ उन ख़बरों को सुनकर अपना दुख साझा किया था, तो उन्होंने इसे यह कहकर टाल दिया था, “तुम इतने हैरान क्यों हो? उनकी निजी ज़िंदगी से हममें से किसी को क्या फ़र्क पड़ना चाहिए?”
#pornpeddler अमित मालवीय को BJP का सोशल मीडिया इंचार्ज बनाना, BJP के आला नेताओं की सोच का एक और सबूत था।
अगर उन्होंने दूसरे मोर्चों पर अच्छा काम किया होता, तो शायद मैं उनके शिकारी जैसे यौन व्यवहार को नज़रअंदाज़ कर देती।
लेकिन नरसंहार करने वाली वैक्सीन का उनका ज़ोर-शोर से प्रचार करना, हिंदू समाज को कुचलने और हिंदू धर्म को बदनाम करने की उनकी बेशर्मी भरी कोशिशें, हिंदुओं पर जानलेवा हमले करने के लिए ‘भीमटाओं’ और ‘मीमटाओं’ को उनका बेहिचक संरक्षण देना, ‘ग्लोबलिस्ट माफ़िया’ के सामने उनका गुलामों जैसा बर्ताव, कठुआ कांड के दौरान हिंदुओं को सताने में उनका शैतानी रवैया (जिसका विस्तृत वर्णन मेरी किताब ‘The Girl From Kathua, A Sacrificial Victim of GhazwaE Hind’ में है , और भी बहुत कुछ, इन सबने मुझे उनके पहले कार्यकाल में ही यह एहसास दिला दिया था कि हम एक शैतानी शासक के चंगुल में फँस गए हैं।
एक ऐसा CIA का एजेंट जिसे भारत को तबाह करने और हिंदुओं का सफ़ाया करने के लिए सत्ता में बिठाया गया है।
मोदी के व्यक्तित्व में मौजूद विकृतियों ने मुझे इस बात का पक्का यक़ीन दिला दिया है कि हमें अपने नेताओं के यौन भ्रष्टाचार पर कहीं ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।
जो लोग इस मोर्चे पर कमज़ोर होते हैं, वे भारत के दुश्मनों द्वारा ब्लैकमेल किए जाने के आगे उन लोगों की तुलना में कहीं ज़्यादा आसानी से घुटने टेक देते हैं, जो सिर्फ़ आर्थिक रूप से भ्रष्ट होते हैं!
मुझे ताज्जुब हुआ कि मधु किश्वर कैसे ऐसा लिख रही हैं जो इतनी करीबी मानी जाती है ? वे कहती हैं कि
“मैं जल्द ही इस बात का सबूत पेश करूँगी कि किस तरह उन्हें पहले ही दिन से ब्लैकमेल किया जा रहा है। और इसी वजह से वे अश्लील ’56 इंच’ वाले डींगें हाँकते हैं।”
फेसबुक वाल से साभार
मधु किश्वर फाइल्स
