Epastein : राहुल के आरोपों के बाद बोले हरदीप पुरी- एपस्टीन से तीन या चार बार हुई थी मुलाक़ात’,  कांग्रेस ने पूछे छह सवाल

नई दिल्ली। एक लंबे गतिरोध के बाद बुधवार को लोकसभा में बजट पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए.
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने पूरी तरह ‘आत्मसमर्पण ‘ कर दिया है.राहुल गांधी जेफ़री एपस्टीन फ़ाइल्स,अनिल अंबानी और अदानी से जुड़े मामलों पर बोले. उन्होंने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर भी आरोप लगाए.

राहुल गांधी की ओर से इन मुद्दों को उठाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तनाव देखने को मिला.हरदीप पुरी ने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल “कुछ मौकों पर, वह भी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुई थी और उनके साथ सिर्फ एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था.”

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ‘निराधार आरोप’ लगा रहे हैं. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के भाषण की ‘ग़लत बातों को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा. राहुल गांधी के इस भाषण से पहले विपक्ष इस बात का विरोध कर रहा था कि उनके नेता को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करने के बाद बोलने नहीं दिया गया.

बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है.
इसके साथ ही उन्होंने एपस्टीन फ़ाइल्स का ज़िक्र किया और कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने ही अनिल अंबानी का परिचय अमेरिकी निवेशक और यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से कराया था.
उन्होंने कहा, ”एक बिज़नेसमैन हैं अनिल अंबानी, मैं पूछना चाहता हूं कि वो जेल में क्यों नहीं हैं? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फ़ाइल्स में है. मैं हरदीप पुरी से भी पूछना चाहूंगा, जिन्होंने उन्हें एपस्टीन से परिचय कराया था. मैं जानता हूं कि किसने परिचय कराया और हरदीप पुरी जानते हैं कि किसने उनका परिचय कराया.”

संसद में एपस्टीन फ़ाइल और हरदीप पुरी को जोड़कर दिए गए बयान के बाद, हरदीप पुरी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, “आज उन्होंने (राहुल गांधी) सदन की कार्यवाही के दौरान एपस्टीन फ़ाइल्स के संदर्भ में मेरा नाम लिया.”
उन्होंने कहा, “एपस्टीन से जुड़ी 30 लाख फ़ाइलें रिलीज़ हुई हैं और मैं न्यूयॉर्क में आठ साल रहा. मैं वहाँ संयुक्त राष्ट्र में भारत का राजदूत बनकर 2009 में पहुंचा था और 2017 में मैं मंत्री बना और आठ सालों में संभवत: तीन या चार मीटिंग का संदर्भ है.”
हरदीप पुरी ने कहा, “पिछले साल नवंबर में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी मेरे पास आए और कहा कि ‘कुछ नाम दिलचस्प जगह पर आए हैं.’ उसके बाद मैंने युवा नेता राहुल गांधी को बताने का फैसला किया और मैंने कहा कि उन्हें एक नोट भेजूंगा.”

उन्होंने कहा, “इस नोट में मैंने लिखा कि अमेरिका में भारतीय राजदूत के पद से रिटायर होने के कुछ महीने बाद मुझे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) में आमंत्रित किया गया था. मैं आईसीएम में सेक्रेट्री जनरल था. इसके अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे. आईसीएम आईपीआई का प्रोजेक्ट था.आईपीआई में मेरे बॉस टेरियल रोड लार्सन उस कुख्यात व्यक्ति, एपस्टीन को जानते थे. आईपीआई और आईसीएम के डेलिगेशन के तौर पर मैं एपस्टीन से कुछ मौकों पर मिला. मैं तीन या अधिकतम चार बार उनसे मिला. आईपीआई और आईसीएम अंतरराष्ट्रीय मामलों को देखता था और एपस्टीन इसका हिस्सा नहीं थे.”हरदीप पुरी का कहना था कि एपस्टीन से जुड़े मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है और जो भी मेल से बातचीत हुई है वो सार्वजनिक है.

हरदीप सिंह पुरी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद कांग्रेस ने बार फिर उनपर हमला बोला. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट डालते हुए पुरी से कुछ छह सवाल पूछे.

पवन खेड़ा ने लिखा, “हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि उनके “संपर्कों” ने उन्हें रीड हॉफमैन से मिलवाया था. लेकिन जो उन्होंने नहीं कहा, वह ज़्यादा मायने रखता है. 4 अक्टूबर, 2014 को एपस्टीन ने हरदीप को ईमेल किया: “क्या रीड से मुलाकात हुई?” हरदीप ने कुछ ही घंटों में जवाब दिया: “मैं आज दोपहर एक मीटिंग के लिए सैन फ्रांसिस्को में हूँ. मेरे दोस्त, तुम तो चीज़ें करवा देते हो. कोई सलाह?”

इसके बाद खेड़ा ने एक्स पर की गई पोस्ट में छह सवाल पूछे, ये सवाल थे –
1. एपस्टीन को रीड के साथ हरदीप की मुलाकात के बारे में पहले ही कैसे पता चल गया?
2. क्या एपस्टीन ही वह “कॉन्टेक्ट” था जिसने रीड हॉफमैन के साथ मुलाकात करवाई थी?
3. हरदीप उससे मुलाकात की जानकारी क्यों डिस्कस कर रहे थे?
4. एपस्टीन को ‘दोस्त’ करके क्यों संबोधित किया गया?
5. एपस्टीन हरदीप के लिए क्या ‘करवा’ रहा था?
6. अगर उनका संबंध महज़ संयोगवश या सतही था, तो हरदीप एपस्टीन से ‘सलाह’ क्यों मांग रहे थे ?

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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