Sanjay saxena
वर्ष 2026 के पहले मौद्रिक नीति समिति के फैसलों का ऐलान आज शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कर दिया। हालांकि उम्मीद की जा रही थी कि रेपो रेट में बदलाव किया जाएगा, लेकिन रिजर्व बैंक ने कोई परिवर्तन नहीं किया। यही नहीं, रिजर्व बैंक ने देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर के अनुमान में भी वृद्धि को रेखांकित किया है।
केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद यह पहली नीतिगत समीक्षा है, जिस पर दलाल स्ट्रीट और आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थी। रिजर्व बैंक ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे यथास्थिति बनाए रखा है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने उम्मीदों के अनुरूप रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि एमपीसी ने नीतिगत रुख को तटस्थ बनाए रखने का निर्णय लिया है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया गया है, जो अब क्रमश: 6.9 प्रतिशत और 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यही नहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने की संभावना है। कीमती धातुओं को छोडक़र, अंतर्निहित मुद्रास्फीति दबाव शांत बने हुए हैं।
एक अच्छी बात यह देखी जा रही है कि रिजर्व बैंक ने उद्योगों और बाजार को कुछ रियायत दी है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा को दोगुना कर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। रिजर्व बैंक का कहना है कि डिजिटल धोखाधड़ी में नुकसान होने पर ग्राहकों को 25,000 रुपये तक के मुआवजे के लिए जल्द ही एक फ्रेमवर्क लाया जाएगा। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए विशेष उपाय प्रस्तावित किए गए हैं। यही नहीं, वित्तीय बाजार सुधार के लिए बैंकों को अब रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स को ऋण देने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, कुछ प्रकार की एनबीएफसी के लिए शाखा खोलने के नियमों में ढील दी जाएगी।
विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर है, जिसे बहुत मजबूत माना जा रहा है। बैठक के बाद गवर्नर ने कहा कि व्यापार समझौते निर्यात को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही, जीएसटी सुधार, मौद्रिक सुगमता और कम महंगाई निजी खपत को सहारा देंगे। आरबीआई एमपीसी की अगली बैठक 6 से 8 अप्रैल के लिए निर्धारित की गई है।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को खासा मजबूत बताते हुए जोर देकर कहा कि घरेलू मुद्रास्फीति व विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य में मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई साल की अंतिम मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा दिया गया, जिससे यह 5.5 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था।
अर्थव्यवस्था के चालकों पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गति से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मांग के मोर्चे पर, ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात की गति को मजबूत समर्थन प्रदान करेंगे।
आरबीआई गवर्नर ने भविष्य के आर्थिक परिदृश्य पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है, जिसके क्रमश: 6.9 प्रतिशत और 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।
हालांकि बाजार को हमेशा रियायतों की दरकार रहती है। रिजर्व बैंक का अपना अनुमान है, लेकिन बाजार की असल हालत कुछ और है। बाजार की रीढ़ माने जाने वाले मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग की हालत में बहुत सुधार नहीं हुआ। उनकी आय भले ही बढ़ी हो, लेकिन उस अनुपात में कर्ज भी बढ़ा है। केवल बैंकों से कर्ज का आंकड़ा रिजर्व बैंक या सरकार के पास रहता है, बाजार से जो प्राइवेट कर्ज उठाया जाता है, उसका सही आंकड़ा नहीं होता। इसलिए सरकारी आंकड़ों और यथार्थ में बड़ा अंतर होता है। बाजार और जीडीपी के आंकड़ों के आधार पर हम बेहतर हैं, लेकिन यथार्थ वैसा नहीं है। बीपीएल के लोगों की हालत सुधरी हो सकती है, पर मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग आज भी पिस ही रहा है।
