भोपाल। राजधानी का जिला चिकित्सालय लगातार रिकार्ड बना रहा है। जेपी अस्पताल में जितनी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, उतना ही वहां लापरवाही और अराजकता का माहौल बनता दिख रहा है। सुबह की पारी में तो जो होता है, वो होता ही है, शाम को अस्पताल का कोई धनी-धौरी नहीं होता।
घटना मंगलवार की है। दोपहर में एक रोगी को दिखाया, डाक्टर बोला शाम को सर्जन आएंगे, उन्हें दिखाकर फिर दवा लेना। अब शाम को जब युवती को लेकर परिजन गए तो पता चला कि अस्पताल में सन्नाटा छाया हुआ था। केवल दंत चिकित्सा विभाग में डाक्टर दिखाई दे रहे थे, बाकी जगह भटकते मरीज ही दिख रहे थे। अस्पताल के अधीक्षक को फोन लगाया, उन्होंने लापरवाहीपूर्वक जवाब दिया कि डाक्टर आने वाले होंगे। आप खुद उन्हें फोन लगा लो, और फोन काट दिया।
फिर फोन लगाया गया सीएमएचओ डा. प्रभाकर तिवारी को। दो बार फोन लगाने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया। फिर स्वास्थ्य मंत्री के बंगले पर चर्चा की गई। वहां से एक फोन नंबर दिया गया। उस फोन पर अस्पताल से फोन किया तो पता चला कि उसने भी फोन नहीं उठाया। सीएमएचओ की हालत तो यह है कि अखबार के दफ्तर से पिछले छह महीनों के दौरान उन्हें जितने भी फोन लगाए गए, एक बार भी उन्होंने नहीं उठाया। और सरकार उन्हें लगातार भोपाल में पदस्थ किए हुए है। कुल मिलाकर जयप्रकाश अस्पताल में शाम को छह बजे, जब बारिश भी हो रही थी, मरीज और परिजन दो घंटे भटकने के बाद चले गए। उन्हें इलाज नहीं मिल सका।
ये है भोपाल का जिला चिकित्सालय
शाम की पारी में सन्नाटा, दो घंटे भटकते रहे मरीज
