भोपाल। रतलाम जिले के आलोट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय को प्रदेश भाजपा ने शो- काज नोटिस जारी किया है। चिंतामणि मालवीय ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों की स्थायी अधिकरण को लेकर अपने ही सरकार को घेरा था।
सरकार को अपने ही विधायक के कारण बैक फुट पर आना पड़ा था। मामले की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची, इसके बाद प्रदेश नेतृत्व की ओर से चिंतामणि मालवीय को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की ओर से जारी हुए नोटिस में लिखा गया है कि चिंतामणि मालवीय के ताजा बयानों और कृत्यों की वजह से पार्टी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। चिंतामणि मालवी को 7 दिनों में जवाब देने के लिए कहा गया है।
आलोट विधायक बोले- किसानों को जमीन का स्थायी अधिग्रहण का नोटिस
बजट पर बोलते हुए आलोट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा- मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने 2 हजार करोड़ रुपए उज्जैन सिंहस्थ के लिए रखे हैं, उज्जैन उन पर अभिमान करता है।
उज्जैन उनको अपना नेता मानता है, उज्जैन को गर्व है कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री उज्जैन से है। लेकिन, आज उज्जैन का किसान बहुत डरा और परेशान है। क्योंकि, सिंहस्थ के नाम पर उसकी जमीन पहले केवल 3-6 महीनों के लिए अधिग्रहित की जाती थी लेकिन आज उन्हें स्थायी अधिग्रहण का नोटिस दिया गया है।पता नहीं किस अधिकारी ने यह विचार रखा है कि, स्पिरिचुअल सिटी (आध्यात्मिक नगरी) बनाएंगे। मैं बताना चाहता हूं कि स्प्रिचुअलिटी किसी सिटी में नहीं रहती है। वह तो त्याग करने वाले लोगों से होती है। हम क्रांक्रीट के भवन बनाकर स्पिरिचुअल सिटी नहीं बना सकते।
किसानों को बचाने सब मिलकर CM से करें निवेदन
इस बीच तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा- धन्यवाद डॉ. चिंतामणि मालवीय जी और मेरे दोनों साथी सतीश जी और अनिल जैन साहब। मैं आपसे भी निवेदन करना चाहता हूं कि, उज्जैन के किसानों को बचाने के लिए हम सब मिलकर मुख्यमंत्री जी से निवेदन करें।
परमार के बाद डॉ चिंतामणि मालवीय ने कहा- इसके पीछे उज्जैन के किसानों को आशंका है कि कॉलोनाइजर्स और भू-माफिया का यह षड्यंत्र है। पैसा प्रतिभा से कमाया जाता है और जो जितना प्रतिभाशाली होता है, उतना ही धनवान भी होता है, ऐसा माना भी जाता है।
सिंहस्थ की जमीन का ऐसे प्रयोग नहीं कर सकते
चिंतामणि मालवीय ने कहा- हम तो पानी के बुलबुले हैं, भोर के सितारे हैं, लेकिन सिंहस्थ पांच हजार वर्षों तक चलेगा। जब तक इस देश में हिन्दू है और विश्व में कहीं भी हिन्दू हैं, सिंहस्थ चलेगा। हम सिंहस्थ की जमीन का इस तरह प्रयोग नहीं कर सकते कि उससे बड़ा नुकसान हो जाए।
मालवीय बोले- ऐसा न हो सिंहस्थ की जमीन खो दें
मालवीय ने कहा- मुझे एक बहुत अच्छा शेर याद आता है कि “ये जब्र भी देखा है, तारीख की नजरों ने, लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सजा पाई” कहीं यह न हो कि हम सिंहस्थ की जमीन को हमेशा-हमेशा के लिए खो दें।
यह उन अधिकारियों के लिए भी है, जो इस तरह की सलाह देते हैं। इसका कोई औचित्य नहीं है, जिन्होंने जमीन नहीं देखी है। सिंहस्थ तंबुओं में होता है, वह बिल्डिंग्स बनाना चाह रहे हैं। कॉलोनाइजर्स को लाभ देना चाहते हैं।
