School Education: जबलपुर श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्य ने किया चार करोड़ का घोटाला, लेकिन कार्रवाई के बजाय आरोपी को भोपाल श्रमोदय विद्यालय का प्राचार्य बना दिया, कमिश्नर की जांच और सिफारिश रद्दी की टोकरी में..

भोपाल। प्रदेश सरकार में भ्रष्टाचार की गंगोत्री में गोते लगाने वाले अधिकारी किस तरह न केवल बच रहे हैं अपितु उन्हें बेहतर प्रभार दिया जा रहा है, ये स्कूल शिक्षा विभाग में देखने को मिल रहा है। एक  अधिकारी की जांच के बाद करोड़ों रुपए के आरोपी की वसूली और  इसके साथ ही बड़ी कार्रवाई करनेकी सिफारिश संभागीय कमिश्नर करते हैं पर इसके बावजूद संबंधित विभाग के आयुक्त इस  पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। चार करोड रुपए की वसूली जिस अधिकारी से करने के दिशा निर्देश दिए इस अधिकारी को दूसरे स्कूल का प्राचार्य बनाकर भ्रष्टाचार करने के लिए प्रोत्साहित कर दिया यह मामला श्रम विभाग और मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग के अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जबलपुर में स्थित श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्य विजय सिंह महोबिया पर जबलपुर में संस्था की एक 40 करोड रुपए के भवन निर्माण में बड़े घोटाले करने लगे हैं। सूत्रों की माने तो इस 40 करोड रुपए की लागत से बनने साले भवन का निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हुआ बिना निर्माण कार्य पूरे हुए ही प्राचार्य विजय सिंह ने कांट्रैक्टर से भवन का अधिग्रहण कर लिया और संबंधित ठेकेदार को उसके कार्य का भुगतान कर दिया जबकि भवन का निर्माण कार्य 10 से 15 परसेंट शेष रह गया था जिसकी लागत 4 करोड़से 6 करोड रुपए हो सकती है। इस बात की जानकारी जब लोगों को लगी तो इस मामले की शिकायत जबलपुर संभाग के आयुक्त से की गई सम्भागीय आयुक्त ने मामले की जांच कर इस मामले में प्राचार्य विजय सिंह की दोषी पाया और मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर प्राचार्य विजय सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और 4 करोड रुपए की उनसे वसूली से करने के निर्देश का पत्र विधिवत कमिश्नर शिक्षा विभाग को लिखा आश्चर्य की बात ती यह है कि कमिश्नर शिक्षा विभाग ने इस पत्र को रद्दी की टोकरी में  डाल दिया और जबलपुर श्रमोदय विद्यालय से विजय सिंह को हटाकर भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में प्राचार्य के पद पर पदस्थ कर दिया।

जबलपुर संभागायुक्त ने जांच के बाद प्राचार्य महोबिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए 6 अक्टूबर 2023 को आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखा था। 5 माह का समय बीत चुका है अब तक उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई होना तो छोड़िए उन्हें प्राचार्य के पद से भी नहीं हटाया गया है। महोबिया वर्तमान में भोपाल के मुगालिया छाप नीलबड़ स्थित श्रमोदय आवासीय विद्यालय में बतौर प्राचार्य सेवाएं दे रहे हैं। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए आयुक्त से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर किसी भी तरह का जवाब देना ठीक नहीं समझा। अब श्रम विभाग और शिक्षा विभाग में यह चर्चाएं जोरो पर चल रही है कि जिस अधिकारी से 4 करोड़ रुपए वसूली के निर्देश और उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए पात्र जबलपुर संभाग आयुक्त ने लिखा उसके खिलाफ कार्रवाई करना, वसूली करना तो दूर शिक्षा विभाग के आयुक्त ने उसकी पदस्थापना जबलपुर से हटकर भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में करके फिर भ्रष्टाचार करने की खुली छूट देने के लिए कर दी सहने अब दोनों विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में यह चर्चा है कि इस अधिकारी को सजा मिली है या उसे प्रोत्साहित किया गया है।

चार करोड़ का काम हुआ ही नहीं

जबलपुर संभागायुक्त ने अपने पत्र में यह भी बताया था कि कुल 40 करोड़ के निर्माण कार्य में 10% कार्य जो कि करीब 4 करोड़ का था, मौके पर हुआ ही नहीं है। यहीं वजह रही कि श्रमोदय विद्यालय जबलपुर के तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोबिया पर निर्माण निर्माण एजेंसी को 4 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ दिलाने का आरोप सही साबित हो गया। इसी को देखते हुए संभागायुक्त ने महोबिया से ही उक्त राशि की वसूली करने के साथ ही उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए लिखा था।

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