भोपाल। राजधानी भोपाल भले ही सालों बाद स्मार्ट नहीं हुआ है। स्मार्ट सिटी में बनी सड़कें गड्ढे में तब्दील है लेकिन यहां संविदा पर काम करने वाले इंजीनियर साहब की संपत्ति 300 गुना बढ़ गई है। लोकायुक्त के छापे में यह खुलासा हुआ है। यहां ये उल्लेखनीय है कि कई अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद इसीलिए संविदा पर रख जाता है, ताकि वे अपने भ्रष्टाचार की फाइलें दबा कर रख सकें।
लोकायुक्त की टीम ने आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद भोपाल नगर निगम से रिटायर्ड इंजीनियर प्रदीप कुमार जैन के घर पर छापेमारी की है। प्रदीप कुमार जैन अभी भोपाल स्मार्ट सिटी में संविदा पर इंजीनियर हैं। अभी तक की छापेमारी में 5 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। यह संपत्ति उनकी कमाई से 300 गुना अधिक है।
इंजीनियर का घर एयरपोर्ट रोड स्थित पॉश लार्ड्स कॉलोनी में है। घर के साथ-साथ इंजीनियर के ऑफिस में भी छापेमारी चल रही है। छापेमारी के स्मार्ट सिटी दफ्तर में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी में प्रदीप जैन के पास वित्तीय पावर भी था। लोकायुक्त भोपाल को इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। इसके बाद इसका सत्यापन किया गया और कार्रवाई की गई है।
लोकायुक्त अफसरों के अनुसार सत्यापन के दौरान प्रथम दृष्टया लगभग 300 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित की है। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय से सर्च वारंट लिया गया था। इसके बाद नौ अगस्त को ऑफिस और घर पर एक साथ कार्रवाई की गई है।
और भी भ्रष्ट अफसर संविदा पर जमे हैं
नगर निगम करोड़ों का भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों को निगम के अलावा अन्य विभागों में संविदा पर नियुक्त करके रखा हुआ है। पानी के मीटर घोटाले के सरदार को पूर्व मुख्य अभियंता ए आर पवार को जल निगम में पदस्थ करवाया गया है। जल निगम तो रिटायर अफसरों का आसरा गृह बन गया है। यहां पदस्थ अधिकारियों के यहां छापे मारे जाएं और पुरानी फाइलें खंगाली जाएं तो करोड़ो के घपले मिलेंगे और इनकी संपत्ति भी करोड़ों में मिलेगी। नगर निगम के ऑटोमोबाइल घोटाले की फाइलें भी दबा दी गई।
