MP: मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर पर हाईकोर्ट की रोक:चीफ जस्टिस ने कहा- जो टीचर ऑटोनोमस में पदस्थ, वे दूसरी जगह नहीं जा सकते

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रदेश के ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेज से सरकारी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के रूप में ट्रांसफर पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस निर्णय को प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा में सुधार के लिए बेहद अहम बताया जा रहा है। हाईकोर्ट ने ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी के ट्रांसफर पर दायर की गई अपील को डिवाइड ऑफ मेरिट (योग्यता का विभाजन) करार देते हुए खारिज कर दिया।

एमपी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कैत और जस्टिस एसए धर्माधिकारी की डबल बैंच ने राज्य सरकार को फटकार भी लगाई। कहा- यदि भविष्य में ऐसे ट्रांसफर किए गए तो इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना माना जाएगा।
इंदौर की ऑटोनॉमस फैकल्टी डॉ. शिवनारायण लहरिया, डॉ. रोहित मन्याल, डॉ. अजय भट्ट और डॉ. भारत सिंह और भोपाल से डॉ. सुबोध पांडे, डॉ. जूही अग्रवाल समेत कई डॉक्टर्स का ट्रांसफर करते हुए उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज नीमच और मंदसौर भेज दिया गया था। सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट (इंदौर) में चुनौती दी गई। कोर्ट की सिंगल बैंच ने ट्रांसफर ऑर्डर खारिज कर दिया। सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने डबल बेंच में याचिका लगाई थी।

यह था मामला
डॉ. शिवनारायाण लहरिया इंदौर मेडिकल कॉलेज में पोस्टेड हैं। उनका ट्रांसफर अन्य जगह हुआ, जिस पर वे हाईकोर्ट गए और यहां से 26 जुलाई को आदेश हुआ और उनका ट्रांसफर ऑर्डर निरस्त किया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन अपील में गया।
इस पर हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा-जब पहले ही इस मामले में एक नहीं और भी फैसले आ चुके हैं और साफ है कि मेडिकल कॉलेज में एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसफर नहीं हो सकते हैं, फिर यह क्यों अनावश्यक अपील की गई है। इस तरह से बेवजह शोषण किया जा रहा है और इसके चलते याचिकाएं लग रही हैं।

मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर ने दिया ऑटोनोमस होने का हवाला
फैकल्टी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज ऑटोनोमस बॉडी है। उनकी नियुक्ति ऑटोनोमस बॉडी में हुई है। ऐसे में उनका ट्रांसफर अन्य जगह नहीं हो सकता है। जब शासन कहीं और कॉलेज खोलता है, तो फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए वह फैकल्टी को यहां से वहां करता है, जो नियम के विरुद्ध है।

प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में कोई भी सीट खाली न रहे

सीपीएस डिप्लोमा पाठ्यक्रम की 92 सीट में से 32 सीट को 2022-23 में समाप्त कर दिया गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस एसए धर्माधिकारी की बेंच ने गुरुवार को इस संबंध में फैसला दिया। उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में यदि किसी भी मेडिकल कॉलेज में किसी भी पाठ्यक्रम में कोई भी सीट खाली रहती है तो यह अदालत की अवमानना होगी।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles