इंदौर। इंदौर में हुई एक वाद-विवाद प्रतियोगिता में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने के बाद शहर के भाजपाई महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र इन दिनों विपक्षी दलों व सरकार विरोधी लोगों के बीच छाए हुए हैं। विपक्ष के नेता महापौर पुत्र के वाद-विवाद प्रतियोगिता में बोलने के उस वीडियो को इस तरह प्रचारित कर रहे हैं, जैसे उन्होंने सरकार की पोल खोलने व उसे नीचा दिखाने के लिए वह सब बातें कहीं थीं। विपक्षी दलों के इसी रवैये ने कैबिनेट मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय को नाराज कर दिया है। इस पूरे वाकिये को उन्होंने निंदनीय और अमानवीय बताते हुए महापौर पुत्र का बचाव किया और कहा कि संघमित्र वहां केवल वाद-विवाद प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए अपनी वाक कला का प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए कला की अभिव्यक्ति की।
विजयवर्गीय ने कहा कि ‘दुःख की बात यह है कि संघमित्र को केवल इस वजह से ट्रोल किया जा रहा है क्योंकि वे इंदौर के मेयर पुष्यमित्र जी के पुत्र हैं। यह आलोचना एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर युवा की प्रतिभा और आत्मविश्वास को तोड़ने का प्रयास है। यह व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि हमारे समाज की सोच पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कितना खेदजनक है कि राजनीति इतनी नीचे गिर जाए कि बच्चों की मासूम प्रतिभा भी उसकी भेंट चढ़ जाए।’ आगे उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति का इस स्तर तक गिरना वास्तव में चिंताजनक है। साथ ही उन्होंने संघमित्र की वाकपटुता की सराहने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की भी तारीफ की।
सामान्य वक्तव्य पर बनाया जा रहा राजनीतिक मोहरा’
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा, ‘आज हृदय व्यथित है, इंदौर महापौर पुष्यमित्र जी के सुपुत्र संघमित्र को वाद-विवाद प्रतियोगिता के एक सामान्य वक्तव्य पर राजनीतिक मोहरा बनाना न केवल निंदनीय है, बल्कि अमानवीय भी प्रतीत होता है। वाद-विवाद प्रतियोगिता का मूल ही यही है कि कुछ प्रतिभागी पक्ष रखते हैं तो कुछ विपक्ष। संघमित्र ने वहां विपक्ष की भूमिका निभाते हुए अपनी वाक्-कला का परिचय दिया। यह ठीक वैसा ही है जैसे रंगमंच पर कोई अभिनेता कभी नायक तो कभी खलनायक का अभिनय करता है। जैसे मेरे प्रिय मित्र आशुतोष राणा जी इंदौर में कल आयोजित होने वाले “हमारे राम” नाटक में रावण की भूमिका निभा रहे हैं। क्या इससे वे सचमुच रावण हो गए? नहीं, यह तो केवल कला की अभिव्यक्ति है।’
राजनीति का इस स्तर तक गिरना चिंताजनक’
आगे विजयवर्गीय ने लिखा कि ‘दुःख की बात यह है कि संघमित्र को केवल इस वजह से ट्रोल किया जा रहा है क्योंकि वे इंदौर के मेयर पुष्यमित्र जी के पुत्र हैं। यह आलोचना एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर युवा की प्रतिभा और आत्मविश्वास को तोड़ने का प्रयास है। यह व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि हमारे समाज की सोच पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। कितना खेदजनक है कि राजनीति इतनी नीचे गिर जाए कि बच्चों की मासूम प्रतिभा भी उसकी भेंट चढ़ जाए। मध्यप्रदेश की राजनीति का इस स्तर तक गिरना वास्तव में चिंताजनक है।’
इसके बाद मंत्री ने सीएम की तारीफ करते हुए लिखा कि, ‘मैं हृदय से माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी का आभारी हूं, जिन्होंने संघमित्र की वाकपटुता को न सिर्फ सराहा बल्कि कुछ सुझाव भी दिए। उनका यह कदम न केवल प्रोत्साहन है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सच्ची प्रतिभा को राजनीति के तराजू में नहीं तोला जाना चाहिए।
संघमित्र ने रेल सुविधाओं को लेकर किया था कटाक्ष
बता दें कि इस वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन 4 सितंबर को हुआ था, जिसमें संघमित्र ने विपक्ष की तरफ से बोलते हुए मोदी सरकार की रेल नीति की जमकर आलोचना की थी। संघमित्र ने मुख्यमंत्री के सामने भरे मंच से देश की रेल सुविधाओं पर तीखा हमला बोला था। संघमित्र ने कहा था ‘वेटिंग लिस्ट का आलम तो ऐसा है कि 50 लाख से ज्यादा लोग हर साल टिकट लेने के बाद भी सफर नहीं कर पाते हैं। बुलेट ट्रेन का वादा हुआ था। कहा गया था कि 2022 तक अहमदाबाद से मुंबई तक सरसराते हुए ट्रेन जाएगी। लेकिन 2025 आ गया है, बुलेट ट्रेन तो नहीं लेकिन वादाखिलाफी की रफ्तार जरूर दौड़ रही है। करोड़ों रुपए खर्च हो गए, जमीन अधिग्रहण में घोटाले हो गए, लेकिन बुलेट ट्रेन सरकार की पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन से बाहर नहीं आ पा रही है।’
मुख्यमंत्री ने की थी संघमित्र की वाककला की तारीफ
हालांकि कार्यक्रम के बाद सीएम मोहन यादव ने संघमित्र की जमकर तारीफ की थी, और कहा था कि ‘अपने भतीजे के लिए भी मैं जोरदार तालियां बजवाना चाहूंगा, यद्यपि मैं उससे बोलूंगा कुछ बात बाकी है। लेकिन उसने जिस बेबाकी से अपनी बात रखी। पक्ष हो या विपक्ष, उसको जो जवाबदारी मिली, वही तो बोलेगा। उसको विपक्ष का विषय मिला तो बोला। उसमें कोई मनाही नहीं है। लेकिन मैं उसके कुछ विषय जरूर सुधरवाऊंगा।’
