MP : प्रहलाद पटेल ने कहा- ईमानदारी से काम होता तो नदी-नाले खाली नहीं होते

खंडवा। मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने खंडवा में एक कार्यक्रम में पंच-सरपंचों से कहा कि मेरे पास नाली, रोड, डैम बनाने के लिए पैसा मांगने मत आना। उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा-मेरे पास नाली, सीसी रोड, बाउंड्रीवॉल और स्टाप डैम का पैसा मांगने मत आना। इस राज्य में इतने स्टाप डेम बने हैं कि प्रत्येक नदी नाले के 50 मीटर पर स्टाप डेम बन जाना था। अगर ईमानदारी से काम हुआ होता तो आज कोई नदी नाले खाली नहीं होते, इसीलिए मैंने मनरेगा पर रोक लगाई। ये साफ है कि जो भ्रष्टाचार करेगा, उस पर कार्रवाई भी सख्ती से होगी।
मंत्री प्रहलाद पटेल सोमवार को खंडवा में किशोर कुमार ऑडिटोरियम में आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं गढ़े मुर्दे उखाड़कर पीछे की ओर जाना नहीं चाहता। सरपंचों से कहा कि आपको को चिंतन करना चाहिए। कर्तव्यों के प्रति सजग होना पड़ेगा। मंत्री पटेल ने मनरेगा योजना में नए कामों पर रोक लगाने के बारे में भी सफाई दी।
ईमानदारी से काम होते तो कोई नदी सूखी नहीं होती
मंत्री ने कहा- अगर ईमानदारी से काम किए होते तो कोई भी नदी नाले सूखते नहीं। आपके ग्राम पंचायत में किसी नदी का उद्गम होगा, जल का स्रोत होगा, कोई नदी निकलती होगी, कोई नाला निकलता होगा, तो आपने अपने बुजुर्गों को ये कहते सुना होगा कि यहां नदी या नाले में पानी बहा करता था, अब तो यह दिसंबर में ही सूख जाती है।
मंत्री ने कहा- मैं आज कावेरी कुंड से आया, मैंने वहां सबसे पहले यही पूछा कि इस कुंड में पानी कब तक रहता है। लोग बोले, अब तो दिसबंर में सूख जाता है। उन्होंने बताया कि अब पाइप से पानी भरना पड़ता है। हम कावेरी की बात कर रहे हैं। मैं अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक एक ही नदी को देखता हूं, जिसका नाम है कावेरी, जो नर्मदा को क्रॉस करके दूसरी तरफ जाती है और फिर जाकर आगे मिलती है।
पर्यावरण का पैमाना क्या है, पर्यावरण का पैमाना आपका पक्का मकान नहीं है। आपकी दुकान नहीं है। पर्यावरण का पैमाना यही है कि मेरे कुएं में पानी कितने ऊपर या नीचे है। हमारी नदियां 12 महीने बह रही हैं या नहीं।
महात्मा गांधी ने देश की राजनीति को दिशा दी
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि पंचायत राज की अवधारणा महात्मा गांधी ने दी है। उसी पंच-परमेश्वर के सिद्वांत से आज देश की राजनीति को दिशा मिली है। महात्मा गांधी हों, पंडित दीनदयाल उपाध्याय हों, डॉ. राममनोहर लोहिया हों। यह तीन ऐसे भारतीय विचारक थे, जिन्होंने इस देश की राजनीति को दिशा देने का काम किया।
महात्मा गांधी ने कहा है कि पंचायती राज की कल्पना हमारी परंपराओं में है। पंच परमेश्वर में पंचायत को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी होना चाहिए। समाज वैमनस्य विहीन होना चाहिए, कोई विवाद हो तो उसके फैसले चौपाल पर ही होना चाहिए। सबकी चिंता करना यह पंच परमेश्वर का उत्तरदायित्व है। पंडित दीनदयाल ने कहा कि दरिद्र नारायण की सेवा ईश्वर की सच्ची सेवा है।
पैसे की कमी नहीं है, बजट चार गुना से ज्यादा हुआ
मंत्री पटेल ने कहा कि इस बार राज्य वित्त के बजट में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। पिछली बार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का बजट जहां 1400 करोड़ रूपए का था। वहीं इस बार यहीं बजट 6 हजार करोड़ रूपए का हो गया है। यानी चार गुना से भी ज्यादा मिला है। इसलिए पैसे की कोई कमी नहीं है।
नदियों के स्त्रोत, उद्गम पर ध्यान देना जरूरी
जल गंगा अभियान अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में यह मुहिम अगले तीन महीने तक चलेगी। सरकार का संकल्प है कि नदियों का संरक्षण हो। जो हमारे जल स्रोत है, और उनके गिरते हुए जल स्तर को रोकने में मदद करे। नदियों और नालों को बचाने के लिए सरकार ने यह काम अपने हाथ में लिया है। यह काम जनभागीदारी से होगा।



