MP: पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के करीबी, कमला पार्क पर रिलायंस पेट्रोल पंप की अनुमति दिलाई गई, ग्रीन बेल्ट में जमीनों का खेल भी हुआ…

भोपाल। कल भोपाल के एक प्रमुख बिल्डर और त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इसके साथ ही रूपम सेवानी सहित अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की है। राजेश शर्मा पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का खास है और बैंस के दबाव में ही कमला पार्क में रिलायंस पेट्रोल पंप की अनुमति दिलाई गई थी। राजेश शर्मा और एक अग्रवाल कारोबारी के साथ बैंस की व्यावसायिक साझेदारी बताई जाती है। पूर्व मंत्री रामपाल सिंह सहित कई अधिकारियों का पैसा इनके माध्यम से कई प्रोजेक्ट में लगाया गया है। यही नहीं प्रशासन के माध्यम से डूब और ग्रीम बेल्ट की कई एकड़ जमीनों का उपयोग बदलवाया गया था।

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।कल की छापेमारी भोपाल के सूरजपुर, मेंडोरा और अन्य स्थानों पर की गई। जो आज भी जारी बताई जा रही है।  इससे पहले भी रिटायर्ड आईएएस इकबाल सिंह बैस के करीबी लोगों के कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। राजेश शर्मा त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक हैं। वे भोपाल में क्रेशर संचालकों के संगठन का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उनका व्यवसाय राजधानी भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ है, जहां वे खदानों के ठेके और क्रेशर संचालन का कार्य करते हैं। इसके अलावा, वे बिल्डर कारोबार से भी जुड़े हुए हैं, जो उनकी व्यावसायिक गतिविधियों का एक अहम हिस्सा है। आयकर विभाग की टीम ने राजेश शर्मा के साथ-साथ विनोद अग्रवाल, दीपक भावसार और रियल एस्टेट कारोबारी विश्वनाथ साहू के परिसरों पर भी छापेमारी की है। ये सभी लोग भूमि और संपत्ति कारोबार से जुड़े हैं। दीपक भावसार को एक पूर्व मंत्री का करीबी बताया जा रहा है। उनके पास भोपाल के नीलबड़ और रातीबड़ में कई जमीनें हैं। आयकर विभाग की अलग-अलग टीमें कुल 8-10 स्थानों पर छानबीन कर रही हैं।इन लोगों का नाम भोपाल के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट सेंट्रल पार्क से जुड़ा हुआ है।

रियल एस्टेट कारोबारियों पर आयकर विभाग के छापे पर मध्यप्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैंने इस बात को सदन के पटल पर रखा। स्पीकर से कहा कि आपसे 9 महीने से आग्रह कर रहा था, बार-बार कह रहा था कि यहां भ्रष्टाचार है। रिटायर हो चुके पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया। अरबों- करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति अर्जित की। न जाने क्यों संरक्षण दिया जा रहा था। आज आईटी ने रेड मारी है और अगर बिना दबाव के जांच हो जाती है, तो बड़ा घोटाला निकलकर सामने आएगा। इन बिल्डरों को नेताओं का संरक्षण है, मैं इनके नाम भी जानता हूं। इन बिल्डरों की जहां जमीनें हैं, वहां ग्रीन बेल्ट कम कर दिए गए। गलत तरीके से नक्शे बदले गए, मेरे पास इसके प्रमाण भी हैं।

जानकारी के अनुसार कमला पार्क के रिलायंस पेट्रोल पंप में पूर्व सीएस बैंस की भी हिस्सेदारी है। इस पेट्रोल पंप को पहले अनुमति नहीं मिल रही थी, लेकिन बैंस ने दबाव बनाकर अनुमति दिल दी। यह भी नियम विरुद्ध बताई जा रही है। इसके अलावा सेवनिया गोंड में ग्रीन बेल्ट की जमीन थी। इसकी लीज को पहले निरस्त करवाया गया, फिर राजेश शर्मा एवं अन्य को मगर ग्राम निवेश विभाग से अनुमति दिला दी। इनमें पीयूष गुप्ता और सोनू भैया के नाम लिखे हुए हैं।यहां सेंट्रल पार्क के नाम से प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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