MP : नेताओं को हर 5 साल में देनी होती परीक्षा.. राज्य सेवा अफसरों से बोले सीएम, कहा- आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचें

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रशिक्षण, पढ़ाई के बाद की वह प्रक्रिया है जो व्यक्ति को जिम्मेदार पदों के लिए तैयार करती है। उन्होंने कहा— ‘बड़े पदों पर बैठने के बाद अपने ही करीबियों का भाव बदल जाता है। शिक्षण व्यक्ति को गढ़ता है, जबकि प्रशिक्षण व्यक्तित्व को निखारता है।’
मुख्यमंत्री प्रशासन अकादमी में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए शुरू हुए आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा— ‘हम राजनेता हैं, तो हमें हर पांच साल में परीक्षा देनी होती है, लेकिन राज्य सेवा में चयनित युवाओं को यह सौभाग्य मिला है कि अब उन्हें तीस से पैंतीस वर्षों तक किसी परीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।’आपने जो परीक्षा अभी तक दी है, वही काफी है। अब इस नई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएं।
जल से बर्फ बने हैं, फिर जल में ही घुलना है’
सीएम यादव ने गीता के उदाहरण देते हुए कहा कि अफसरों को जल से बर्फ बनने का मौका मिला है, लेकिन अंततः उन्हें फिर जल बनना है, यानी विनम्रता और लचीलापन बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा— ‘हमें क्या करना है, हमारा उद्देश्य क्या है, यह स्पष्ट होना चाहिए। पहले खुद को जानें, तभी असली पहचान बनती है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आउट ऑफ द बॉक्स” सोचें और जनहित में उसका क्रियान्वयन करें। आपको जो अधिकार मिले हैं, वे मेहनत का अवसर भी लेकर आए हैं। भारतीय समाज एक सुसंस्कृत और आत्मनियंत्रित समाज है। अधिकारी इन शक्तियों का उपयोग सेवा-भाव और परिष्कृत दृष्टिकोण से करें।’





