MP: शहर वन विकसित करेगी सरकार, इंदौर के पितृपर्वत का कांसेप्ट प्रदेश के सभी निकायों में लागू करने की तैयारी…

भोपाल। इंदौर के पितृपर्वत की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सिटी फारेस्ट डेवलप किए जाएंगे। चालू वित्त वर्ष के बजट में लाई जाने वाली इस योजना में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में खुली जमीन और पहाड़ी इलाकों में लोगों को प्रोत्साहित कर फारेस्ट एरिया डेवलप कराने का काम किया जाएगा। यह व्यवस्था सभी नगरीय निकायों के लिए शुरू करने का प्रस्ताव नगरीय विकास ने वित्त विभाग को दिया है।

प्रदेश सरकार के जुलाई में आने वाले बजट के लिए विभागवार चर्चाओं का दौर शुरू होने के बाद बजट में नई योजनाओं के प्रस्ताव भी दिए जा रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा सभी विभागों के साथ बजट प्रस्तावों पर उप सचिव स्तर की चर्चा के लिए 3 जून तक का समय तय किया गया है और नगरीय विकास विभाग की बैठकें इसको लेकर हो चुकी हैं जिसमें बजट प्रस्ताव के साथ नई योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। हालांकि नई योजनाओं के प्रस्तावों को अभी अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है।

ऐसे होगा वनीकरण का काम

नगरीय विकास विभाग के अफसरों के अनुसार सरकार के कामों में पब्लिक की भागीदारी बनाने को लेकर नगरीय निकायों की वनीकरण योजना तैयार की गई है। इसके पीछे मंशा यह है कि जब लोग किसी योजना से सीधे जुड़ेंगे तो उसके रखरखाव की भी चिंता करेंगे। इंदौर में पितृ पर्वत में पौधरोपण का जो कांसेप्ट सफल हुआ है, उसमें स्थानीय लोगों ने पौधे लगाने के साथ उसकी सुरक्षा का जिम्मा भी संभाला है। इसके साथ ही जो पौधरोपण के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं, उनके द्वारा इसके संरक्षण के लिए आने वाले खर्च का जिम्मा उठाया गया है। इसके चलते पौधरोपण सफल हुआ है। यही व्यवस्था प्रदेश के सभी निकायों में लागू करने की तैयारी है जिस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा।

ग्रीन बेल्ट की जमीन पर रहेगा फोकस

नगरीय विकास के अफसरों के अनुसार इसके लिए मास्टर प्लान घोषित निकायों में ग्रीन बेल्ट की जमीन पर फोकस होगा। हर निकाय में इसके लिए जमीन का प्रावधान होता है, वहां की जमीन पर पौधरोपण के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर उसके फायदे भी बताए जाएंगे। वहीं जिन निकायों के पास जमीन उपलब्ध नहीं होगी, उसके लिए राजस्व विभाग से जमीन लेकर पौधरोपण के लिए उपयोग में लाने का काम किया जाएगा।

ऐसा है इंंदौर के पितृ पर्वत का इतिहास

इंदौर में गोम्मटगिरि के सामने स्थित पितृ पर्वत को इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि इंदौर के लोगों ने पितरों की याद में हजारों पौधे रोपे हैं। यहां श्राद्ध पक्ष में हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने मित्रों और पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही पूजा- पाठ के लिए पहुंचते हैं। लोगों की आस्था को देखते हुए यहां 108 टन वजनी हनुमान मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई है। भगवान हनुमान की गदा 65 फीट लंबी है, जिसको देखने के लिए हर रविवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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