भोपाल। राजस्व मंडल में पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी अश्विनी कुमार राय शुक्रवार 31 मई को रिटायर हो गए लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने से रिक्त पद पर प्रमोशन के लिए प्रतीक्षारत संजय दुबे का पदोन्नति आदेश जारी नहीं हो सका। जीएडी ने पद रिक्त न होने के हवाला देकर पदोन्नति टाल दी।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पद रिक्त न होने के नाम पर अपर मुख्य सचिव पर पदोन्नति आदेश जारी नहीं किए गए। इसके चलते अब प्रमुख सचिव गृह संजय दुबे को अपर मुख्य सचिव बनने के लिए तीन माह तक इंतजार करना पड़ेगा। अगस्त में व्यापमं के अध्यक्ष संजय बंदोपाध्याय रिटायर होंगे, उसके बाद एक सितम्बर से रिक्त होने वाले पद पर संजय दुबे को प्रमोट किया जाएगा। संजय दुबे का इंतजार बढऩे के साथ उनके बाद एसीएस बनने का इंतजार कर रहे नीरज मंडलोई को अब सितम्बर में सीएस वीरा राणा के रिटायर होने के बाद ही प्रमोशन मिल सकेगा। इसके विपरीत अगर 31 मई को रिटायर होने वाले अश्विनी कुमार राय के रिक्त स्थान पर दुबे को प्रमोशन मिल जाता तो मंडलोई को एक सितम्बर को एसीएस बनने का मौका मिल जाता।
पद रिक्त न होने की जो दिक्कत बताई जा रही है उसके अनुसार पिछले साल केंद्र में पदस्थ संजय बंदोपाध्याय की एमपी में वापसी के बाद यह स्थिति बनी है। बंदोपाध्याय लौटे तो कोई पद रिक्त नहीं था। इसलिए पद रिक्त होने पर उनकी पदस्थापना एसीएस पद पर क्लियर हुई। इसके बाद मुख्य सचिव वीरा राणा को मार्च में रिटायर होना था लेकिन उन्हें छह माह का एक्सटेंशन मिल गया। दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा किया जा रहा है कि इसी दौरान कल्पना श्रीवास्तव को रिटायर होने के पहले मुख्य सचिव वेतनमान देकर अपर मुख्य सचिव बना दिया गया था जबकि तब भी पद रिक्त नहीं था। इसको लेकर दलील दी जा रही है कि दो माह के लिए कैबिनेट ने इस पद की स्वीकृति दी थी और कल्पना श्रीवास्तव के रिटायर होने के साथ यह पद भी खत्म हो गया। गौरतलब है कि एमपी में मुख्य सचिव वेतनमान वाले 14 पद हैं।
MP: अश्विनी राय तो रिटायर हो गए, लेकिन संजय दुबे नहीं बन पाए एसीएस
दुबे-मंडलोई को तीन माह का इंतजार करना होगा
