भोपाल। प्रदेश में सीबीआई की जांच में सूटेबल (फिट) पाए गए 169 नर्सिंग कॉलेजों की दोबारा जांच होगी। हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की याचिका पर ये आदेश दिया है। अदालत ने पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने को भी कहा है। लेकिन सबसे आचार्य की बात ये है कि तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री की भूमिका को लेकर कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने भी केवल अफसरों पर कार्रवाई की बात कही है। जबकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले की यदि बारीकी से जांच की जाती है तो तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं।
रिश्वत मामले में सीबीआई इंस्पेक्टर मजोका बर्खास्त
नर्सिंग कॉलेज रिश्वतखोरी मामले में आरोपी सीबीआई इंस्पेक्टर सुशील मजोका को बर्खास्त कर दिया गया है। सीबीआई में डेपुटेशन पर पदस्थ रहे मजोका को 22 मई को निलंबित किया गया था। इससे पहले सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज को बर्खास्त किया जा चुका है। रिश्वतखोरी मामले में सीबीआई ने 4 अफसरों को मिलाकर कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया है।
याचिकाकर्ता ने ऐसे कॉलेजों की फिर से जांच कराने की मांग का आवेदन हाईकोर्ट में पेश किया था, जिन्हें फिट घोषित कर दिया गया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की स्पेशल बेंच ने इसे स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि दोबारा होने वाली जांच में संबंधित जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट भी सीबीआई के साथ मौजूद रहेंगे। इन सभी कॉलेजों के संचालक और प्रिंसिपल की उपस्थिति में जांच कराई जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 30 मई को होगी।
इससे पहले हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई की जांच टीम ने मध्यप्रदेश के 600 में से 308 नर्सिंग कॉलेजों की जांच रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 308 नर्सिंग कॉलेज में से 169 फिट और 66 अनफिट हैं। इनमें भोपाल के जीएमसी समेत 10 सरकारी हैं। वहीं, 73 कॉलेज मानक पूरे नहीं कर रहे हैं।
पुराने नियमों से पूरी की जाएगी मान्यता प्रक्रिया
याचिकाकर्ता एसोसिएशन के वकील विशाल बघेल ने बताया, ‘नर्सिंग काउंसिल ने सुनवाई के दौरान आवेदन पेश कर हाईकोर्ट से सत्र 2024-25 की मान्यता प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मांगी। इस पर आपत्ति लेते हुए हमने कहा कि सरकार ने जो नए नियम बनाए हैं, वे आईएनसी (भारतीय नर्सिंग परिषद) के मानकों के हिसाब से नहीं है। इनके अनुसार मान्यता प्रक्रिया नहीं की जानी चाहिए।’
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुराने नियमों से ही 2024-25 सत्र के लिए मान्यता प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इंस्पेक्शन करने वाले 111 अफसरों को नोटिस
सीबीआई की जांच रिपोर्ट में अनसूटेबल घोषित किए गए 66 नर्सिंग कॉलेजों का निरीक्षण करने वाले 111 अफसरों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की तरफ से दिए गए हैं। इसमें अफसरों से इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल के मानकों को पूरा नहीं करने वाले नर्सिंग कॉलेजों की रिपोर्ट मानक स्तर की दिए जाने का कारण पूछा गया है।
अनसूटेबल 66 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द
दूसरी तरफ, मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के 66 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश पर की गई। ये सभी कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के मानकों पर की गई CBI जांच में अनफिट पाए गए थे।
सरकार ने संबंधित नर्सिंग कॉलेजों को सील करने की कार्रवाई के निर्देश जिलों के कलेक्टरों को दिए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त ने सभी कलेक्टरों को अनफिट नर्सिंग कॉलेजों की सूची भेज दी है। इनमें भोपाल के 6 कॉलेज हैं। इससे पहले सोमवार को इंदौर में जिला प्रशासन ने 5 नर्सिंग कॉलेजों को सीज किया था।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने प्रदेश के 31 जिलों में कुल 66 नर्सिंग कॉलेजों को अनसूटेबल बताया है। इनमें सबसे ज्यादा 8 कॉलेज बैतूल जिले के हैं। भोपाल दूसरे नंबर पर है।
स्टूडेंट्स पर नहीं होगा कार्रवाई का असर
नर्सिंग कॉलेज की मान्यता निरस्त होने से स्टूडेंट्स पर कोई असर नहीं होगा। वे मध्यप्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा कराई जा रही नर्सिंग परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इनको आगे की पढ़ाई मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेज से करनी होगी।
