MP : छिंदवाड़ा में अजीब बीमारी फेल कर रही बच्चों की किडनी, जेवर-ऑटो बिका, बच्चे भी नहीं बचे

छिंदवाड़ा। 4 साल के बेटे की हंसी घर में अब कभी नहीं गूंजेगी। उसे बचाने के लिए जिंदगी की जमा पूंजी, ऑटो, सब कुछ बेच दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब मैं बेसहारा हूं, पर अपने छोटे बेटे के लिए मुझे जीना होगा। बस दुआ कीजिए कि किसी और पिता को यह दर्द न सहना पड़े।यह कहना है यासीन खान का, जिन्होंने अपने 4 साल के बेटे उसेद को किडनी की बीमारी की वजह से खो दिया है। उसेद समेत छिंदवाड़ा के परासिया में किडनी की बीमारी से एक-एक करके तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई है।

उसेद की ही तरह 5 वर्षीय अदनान खान की भी किडनी फेल होने से जान चली गई। उसके इलाज में परिवार ने 4 लाख रुपए खर्च किए। 4 साल के हितांश सोनी की भी किडनी फेल होने से ही मौत हुई। 9 अन्य बच्चे भी इसी तरह के संक्रमण का इलाज करा चुके हैं, लेकिन बीमारी पकड़ में नहीं आ सकी है। जिला प्रशासन ने अब आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) से जांच कराने का फैसला किया है।

परासिया में किडनी फेलियर से बच्चों की मौत के मामले में ICMR की टीम ने जांच शुरू कर दी है। परिजन के मुताबिक, बच्चों को पहले बुखार और जुकाम हुआ, फिर किडनी में इंफेक्शन। निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के बाद भी हालत बिगड़ती गई। नागपुर में इलाज कराया लेकिन तीन बच्चों की जान चली गई।
भोपाल से स्वास्थ्य विभाग की टीम भी परासिया में डेरा डाले हुए है। टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, पीड़ितों के परिवारों से मिली और जानकारी जुटाई। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने भी टीम के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

14 दिन की बीमारी में चल बसा बेटा
परासिया के मैगजीन लाइन में यासीन खान के घर पर मातम पसरा है। उनका 4 साल का बेटा उसेद खान उर्फ उस्सू 14 दिन बीमार रहने के बाद 13 सितंबर को चल बसा। अब घर में सिर्फ यासीन का छोटा बेटा यामान खान (2 साल) ही बचा है।

यासीन बताते हैं कि 31 अगस्त को उसेद को बुखार आया था। स्थानीय क्लीनिक में इलाज के बाद 6 सितंबर को वह ठीक हो गया। अगले दिन फिर बुखार आया तो उसे छिंदवाड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे नागपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी किडनी में इंफेक्शन है। पेशाब रुक रही है।
नागपुर में यासीन की सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई। बेटे के इलाज के लिए उन्होंने अपना ऑटो बेच दिया, जो उनके रोजगार का साधन था। घर की महिलाओं के जेवर भी बेच दिए गए। इलाज में 3 लाख रुपए खर्च हुए, लेकिन फिर भी उसेद को नहीं बचाया जा सका।
इलाज के दौरान उसेद का तीन बार डायलिसिस करवाया गया, जिससे किडनी की बीमारी में आराम मिला। लेकिन इस बीच उसके ब्रेन में सूजन आ गई। ब्रेन हेमरेज हो गया। 6 दिन चले इलाज के बाद 13 सितंबर की शाम को उसकी मौत हो गई।

18 दिन में 8 लाख खर्च लेकिन नहीं बचा हितांश
उमरेठ के वार्ड क्रमांक 6 में रहने वाले चार वर्षीय हितांश सोनी ने शुक्रवार को दम तोड़ा। पिता अमित सोनी ने बताया कि बच्चे को बुखार आने पर परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ के पास लेकर गए थे। जहां तीन दिन उपचार के बाद भी जब बच्चे को आराम नहीं मिला तो डॉक्टर ने उसे नागपुर रेफर कर दिया।
नागपुर के डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की किडनी में इंफेक्शन हो गया है। 18 दिन के उपचार में 8 लाख रुपए का खर्चा आया, लेकिन हितांश को डॉक्टर बचा नहीं पाए।

तीन मासूमों की मौत, हजारों बच्चों की जांच
परासिया सिविल अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अंकित सहलाम ने बताया कि सर्दी, जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद कुछ बच्चों का निजी अस्पताल में इलाज कराया गया था। अचानक किडनी की समस्या आने लगी। बच्चों को छिंदवाड़ा और नागपुर रेफर किया गया, तो पता चला कि किडनी में इंफेक्शन हो गया है।
तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। कुछ बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार इलाकों का दौरा कर 5 साल तक के बच्चों के सैंपल कलेक्ट कर रही है। जांच के बाद ही कारणों का पता चल पाएगा।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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