MP : हरदा में अंधेरीखेड़ा में अवैध खनन पर जुर्माने में गोलमाल:51 करोड़ की जगह सिर्फ 4 हजार रुपए देने होंगे; जांच में कई त्रुटियां सामने आईं

हरदा। हरदा में अवैध खनन के एक विवादास्पद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे निर्माण में शामिल पाथ इंडिया कंपनी पर लगा 51.67 करोड़ का जुर्माना अब घटकर मात्र 4,032 रुपए रह गया है।
यह मामला करीब दो साल पुराना है। तत्कालीन एडीएम प्रवीण फूलपगारे ने अंधेरीखेड़ा में 18 खसरों में बिना अनुमति 3.11 लाख घनमीटर मुरम मिट्टी की खुदाई पर कंपनी पर 51.67 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसमें 25.83 करोड़ रुपए जुर्माना और उतनी ही राशि पर्यावरण क्षति के रूप में शामिल थी।
तत्कालीन एडीएम डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने मामले की समीक्षा में कई खामियां पाईं। जांच टीम ने न तो मौका पंचनामे पर ग्रामीणों के हस्ताक्षर लिए और न ही फोटो-वीडियोग्राफी की। उन्होंने पाया कि अंधेरीखेड़ा में पाथ कंपनी के अलावा भूमि स्वामियों और अन्य लोगों ने भी खनन की अनुमति ली थी।
आरटीआई से मिली गड़बड़ी की जानकारी एडीएम गौड़ा ने कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए 2,688 घनमीटर अवैध खनन के लिए 4,032 रुपए का जुर्माना तय किया। इसमें अवैध उत्खनन और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए 2,016-2,016 रुपए शामिल हैं। उन्होंने कहा कि खनिज विभाग की लापरवाही के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वास्तविक अवैध खनन किसने किया।
आरटीआई कार्यकर्ता आनंद जाट ने एडीएम कोर्ट की जानकारी आरटीआई से निकाली। इसी के बाद हंगामा मचा हुआ है। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों पर रुपए के लेनदेन के आरोप लगाए हैं। आनंद ने कहा कि करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है। अब वे इस मामले की शिकायत केंद्रीय कार्मिक विभाग नईदिल्ली से करेंगे।
हालांकि, तत्कालीन एडीएम (वर्तमान जिला पंचायत सीईओ खंडवा) डॉ. गौड़ा ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि बतौर न्यायाधीश दस्तावेजी साक्ष्य,अधिवक्ता के तर्क के आधार पर आदेश पारित किया है।
खनिज अफसरों पर लापरवाही का आरोप लगा था तत्कालीन एडीएम डॉ.नागार्जुन बी गौड़ा ने खनिज विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी थी। उन्होंने अपने आदेश में का कि खनिज विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के करण अंधेरीखेड़ा में किसके द्वारा अवैध उत्खनन किया गया, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। शासन को रायल्टी राशि की क्षति हुई है।
इसके लिए खनिज अधिकारी को अलग से पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया जाए। इसमें उत्खनन स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की स्थिति निर्मित न हो यह सुनिश्चित करें।





