CBI: ममता, स्टालिन, भगवंत मान की राह पर मोहन यादव.. मध्यप्रदेश में सीबीआई पर लगाया ‘ब्रेक’

नई दिल्ली ।राज्य में किसी भी मामले में सीबीआई जांच के लिए राज्यों की अनुमित के मुद्दे पर बीजेपी को झटका लगता दिख रहा है। विपक्षी दलों के शासित राज्यों की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार ने भी सीबीआई की जांच को संबंध में एक अहम फैसला किया है। मध्य प्रदेश सरकार ने का कहना है कि सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में जांच शुरू करने से पहले राज्य से लिखित सहमति की आवश्यकता होगी। इस संबंध में मंगलवार को एक अधिसूचना प्रकाशित की गई थी। यह आदेश राज्य में 1 जुलाई से प्रभावी माना जाएगा।

पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब और तमिलनाडु पहले ही सीबीआई जांच की अनुमति को लेकर केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार का मामला तो हाल ही में सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था। अब मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला आया है। मध्यप्रदेश में सीएम मोहन यादव की सरकार ने सीधे-सीधे तो सीबीआई के क्षेत्राधिकार या मामले की जांच को रोकने की बात तो नहीं कही है लेकिन उसने लिखित सहमति का ‘ब्रेक’ जरूर लगा दिया है। इसके साथ ही बीजेपी शासित मध्य प्रदेश उन राज्यों की लंबी सूची में शामिल हो गया है, जिनमें ज्यादातर विपक्षी दलों द्वारा शासित हैं। इनमें बंगाल, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों में सीबीआई को जांच से पहले संबंधित सरकारों से अनुमति लेने की आवश्यकता है।

गृह विभाग के सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से पारित तीन नए आपराधिक कानूनों में से एक भारतीय न्याय संहिता के कार्यान्वयन के बाद नए कानूनी ढांचे का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक था। सूत्रों ने कहा कि बदलावों का पालन करने के लिए अधिसूचना महत्वपूर्ण थी। सूत्रों ने कहा कि अन्य भाजपा शासित राज्यों द्वारा भी इसी तरह की अधिसूचनाएं पारित किए जाने की उम्मीद है। विशेष रूप से, सीबीआई को अब निजी व्यक्तियों, सरकारी अधिकारियों या राज्य के भीतर किसी भी संस्था की जांच करने के लिए मध्य प्रदेश प्रशासन से लिखित मंजूरी की आवश्यकता है।

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