भोपाल। मैं बड़ा तालाब बोल रहा हूं…। मुझे रामसर साइट का दर्जा तो मिल गया, लेकिन मेरा रकबा दिनों-दिन सिकुड़ता जा रहा है। यही नहीं, मुझमें कचरा और सीवर लाइनें भी मिलाई जा रही हैं। आज रक्षाबंधन पर शहर के कुछ जागरूक लोग मुझे रक्षा सूत्र बांधने आए, तो अच्छा लगा। लेकिन ताजा हवा खाने वाले और सेल्फी लेने में रुचि दिखाने वाले एक सूत्र नही बांध सके…।
ये मेरा ही नहीं, इस शहर का भी दुर्भाग्य है कि इसे कोई अपना नहीं मानता। बयानबाजी और बतोले करने वालों की संख्या लाखों में है, पर क्या मुझे (बड़े तालाब) को सही मायने बचाने वाले हजारों में हैं? सवाल मौजूं है। चार लोग ही सही, आज रक्षा सूत्र बांधने आए, अच्छा लगा। कोई रक्षा करने की बात सोच तो रहा है। कल हो सकता है इस संख्या में वृद्धि हो जाए।
बात बड़े तालाब की है तो इसके कैचमेंट क्षेत्र में 20 वर्ग किलोमीटर में एफटीएल के 50 मीटर अंदर तक कब्जा हो चुका है। यहां 1500 से अधिक अतिक्रमणकारी काबिज हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी छोटे कब्जाधारियों पर कार्रवाई कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। बड़े तालाब का जल भराव क्षेत्र 31 वर्ग किलोमीटर और कैचमेंट एरिया 361 वर्ग किलोमीटर है। इसके कैचमेंट एरिया में दो दर्जन से अधिक अवैध शादी हाल संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही 100 से अधिक लोगों ने अतिक्रमण कर यहां पक्कज गोदाम और फार्म हाउस बना लिए हैं। इनमें शहर के राजनीतिक व व्यापारिक लोगों के साथ सरकार के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। इनके रसूख के कारण अब तक नगर निगम भी नोटिस भेजने के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाया, जबकि तालाब का तकरीबन 26 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र खाली हो चुका है। आसपास के लोगों के अलावा भू-माफिया ने भी मौके का फायदा उठाकर अवैध कब्जा कर अधिकांश हिस्से में खेती शुरू कर दी है। वेटलैंड के बड़े हिस्से में कब्जा कर पक्के मकान बना लिए गए हैं, जिससे तालाब में दलदली भूमि कम होती जा रही है। जबकि यह नम भूमि को वेटलैंड का फिल्टर कहा जाता है, क्योंकि यह गंदे पानी को साफ कर जमीन के अंदर पहुंचाती है। नम भूमि के खत्म होते ही वेटलैंड का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा टीएनसीपी और झील संरक्षण प्रकोष्ठ
बड़े तालाब में अवैध निर्माण को वैध करने में बड़ी भूमिका टीएंडसीपी और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों की है, जिसे बिल्डिंग परमिशन नहीं देनी होती झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारी उस भूमि को नीली लाइन से जोड़कर दिखाते हैं। मतलब यह भूमि तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में है। वहीं जिसे परमिशन देनी है, उसे नक्शे में लाल लाइन के पास दिखाया जाता है, यानी कि यह जमीन कैचमेंट क्षेत्र से बाहर है। बिना भौतिक सत्यापन किए टीएंडसीपी और बिल्डिंग परमिशन इस भूमि पर भवन अनुज्ञा की स्वीकृत दे देते हैं।
बड़े तालाब की खत्म हो रही जैव विविधता
भोज वेटलैंड और इसके आसपास 210 प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां पाई गई हैं। वहीं 700 प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में हिमालय पार कर हर साल यहां आते हैं। इनमें कई पक्षी दुर्लभ प्रजाति के होते हैं, लेकिन इनके संरक्षण को लेकर काम नहीं होने से दिनों-दिन बड़े तालाब के किनारे पक्षियों का दर्शन दुर्लभ होता जा रहा है।
-तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में सबसे अधिक अतिक्रमण खानूगांव, बैरागढ़ व सूरज नगर में हुआ है। इसके आसपास स्थित खेतों में रसायनिक घातक कीटनाशकों और उर्वरकों के बेतहाशा उपयोग और जलग्रहण क्षेत्र में धड़ल्ले से अतिक्रमण के साथ हो रहे निर्माण कार्यों ने झील की सेहत बिगाड़ कर रख दी है।
