BHOPAL: पूर्व आरटीओ आरक्षक के यहां 17 घंटे चली रेड, जमीन में गाड़ रखी थी 2 क्विंटल चांदी,  पार्क की जमीन पर बनाया स्कूल, जिस कार में बावन किलो सोना मिला वो दोस्त की

भोपाल। राजधानी में लोकायुक्त की रेड के दौरान आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकाने से चांदी की 200 सिल्लियां मिली थी। ये सिल्लियां उसने अपने ऑफिस में जमीन के अंदर गाड़ रखी थी। पता ये भी चल है कि उसके स्कूल की जमीन का मामला भी विवादित है। ये पार्क की जमीन थी, जिसे हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से आवंटित कराया गया और फिर स्कूल की अनुमति ले ली गई।

ऑफिस बना रखा है। यहां उसने फ्लोर में अंडर ग्राउंड लॉकर बना रखा था। जिस पर दो टाइल्स रखे थे और इसके ऊपर कार्पेट बिछा रखा था।
लोकायुक्त की टीम ने कार्पेट को हटाने बाद टाइल्स चेक किए। यह टाइल्स बजाने पर अंदर से खोखले होने जैसा साउंड कर रहे थे। जब इन्हें हटाया गया तो अंदर प्लास्टिक के 5 बोरे और झोले मिले। इनमें चांदी की 200 सिल्लियां रखी थी। जिनका वजन दो सौ किलो ग्राम है।
इसी ऑफिस में 500 से ज्यादा दस्तावेज मिले हैं। ज्यादातर दस्तावेज प्रॉपर्टी संबंधी हैं। जिसमें एग्रीमेंट सहित बैंक पासबुक, चेक और वसीयत नामे मौजूद हैं।

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2.95 करोड़ कैश, 50 लाख का सोना भी मिला
बता दें कि लोकायुक्त की टीम ने आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के भोपाल के ई-7 अरेरा कॉलोनी स्थित घर और ऑफिस पर गुरुवार सुबह करीब 7 बजे रेड की थी। जो करीब 17 घंटे रात 12.30 बजे तक चली। इस दौरान पुलिस को नोट गिनने की सात मशीन, कुल 2.95 करोड़ कैश, दो क्विंटल चांदी की सिल्ली, दस किलो चांदी के जेवरात और पचास लाख रुपए का सोना मिला है।

भोपाल सहित कई शहरों में प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले
छापे की कार्रवाई में दो कारें, एक स्कूल, एक निर्माणाधीन बंगला, लग्जरी लाइफ स्टाइल का करीब दो करोड़ रुपए कीमत का सामान भी मिला है। जिसमें महंगे कपड़े, कीमती झूमर और धातु की मूर्तियां शामिल हैं। आरोपी के ऑफिस से भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई शहरों में प्रॉपर्टी के दस्तावेज, एग्रीमेंट मिले हैं।

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अब तक आरोपी के तीन बैंक अकाउंट की जानकारी लोकायुक्त टीम को मिली है। इनमें कितना कैश है, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। सौरभ फिलहाल भोपाल में नहीं हैं। कार्रवाई से पहले ही वह दुबई में थे।

सौरभ शर्मा परिवहन विभाग (RTO) में आरक्षक रहे हैं। एक साल पहले वीआरएस ले चुके हैं। फिलहाल, रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं। उनके एक होटल पर भी सर्चिंग गई है। सौरभ ने महज 7 साल की नौकरी में प्रदेश भर में करोड़ों का अवैध साम्राज्य खड़ा किया है।

सवा दो करोड़ में खरीदा था बंगला
अरेरा कॉलोनी के ई-7/17 नंबर के जिस बंगले में सौरभ रह रहा है, उसे साल 2015 में सवा दो करोड़ रुपए में खरीदा गया है। यह बंगला सौरभ अपने जीजा का होना बताता है। इस बंगले की वर्तमान कीमत करीब 7 करोड़ रुपए है। जब बंगला लिया गया, तब सौरभ नौकरी पर था। अनुमान लगाया जा रहा है कि नजर में न आए इसलिए उसने दूसरे के नाम से बंगले को खरीदा था।

सौरभ ने चार साल पहले अपने ग्वालियर में रहने वाले चेतन सिंह गौर नाम के दोस्त को भोपाल बुला लिया। यहां उसके नाम से संपत्तियां खरीदी। मेंडोरी के जंगल में जो इनोवा कार 52 किलो सोने और 11 करोड़ रुपए कैश के साथ आईटी को लावारिस हालत में मिली। वह कार चेतन इस्तेमाल करता था। इस पर एमपी आरटीओ लिखा है। इस कार के साथ चेतन का एक फोटो भी सामने आया है।

घर के इंटीरियर पर खर्च किए दो करोड़ रुपए
सौरभ के घर में कीमती सैनिटरी, झूमर, होम डेकोर का लग्जरी सामान मिला था। इंटीरियर डिजाइनिंग में करीब दो करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

आरक्षक से बिल्डर बन गया सौरभ शर्मा
सौरभ शर्मा वीआरएस लेने से पहले ही रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ गया था। प्रदेश के कई रसूखदारों से उसकी नजदीकी थी। लिहाजा कार्रवाई के डर से उसने वीआरएस लिया और बिल्डर बन गया।

पिता की जगह मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
बताया जा रहा है कि सौरभ को पिता की मृत्यु के बाद परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाला सौरभ साधारण परिवार से था। चंद साल की नौकरी में ही उसका रहन-सहन बदल गया था। इसकी शिकायत विभाग सहित अन्य स्थानों पर की जाने लगी। इस पर सौरभ ने वीआरएस लेने का फैसला लिया। इसके बाद भोपाल के कई नामचीन बिल्डरों के साथ प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करने लगा।

परिवार के कुछ फोटो

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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