नीलकंठेश्वर धाम में झरी शिव-सुरों की दिव्य सांस्कृतिक रसधार…संस्कृति विभाग ने किया उदयपुर में महादेव महोत्सव का आयोजन

भोपाल। राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा विदिशा जिले के उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आज शिव-शक्ति की कला अभिव्यक्तियों पर एकाग्र “महादेव महोत्सव” का आयोजन किया गया। समारोह में शिव केंद्रित नृत्य नाटिका, लोक गायन एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां संयोजित की गईं।
   
महादेव के प्रेम से आह्लादित प्रस्तुति ने शिव भक्ति, लोक परम्परा और शास्त्रीय-सुगम कलाओं के सुरम्य त्रिवेणी के रूप में श्रद्धा और भक्ति की एक अनुपम आध्यात्मिक एकत्व को रचा। संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन विदिशा के सहयोग से यह आयोजन किया गया।
     
लोक-सुरों की मधुर और अनुपम धारा जब मंदिर प्रांगण में प्रवाहित हुई, तो वातावरण स्वयं शिवमय हो उठा। हरदा की लोक गायिका सुश्री मिशा शर्मा ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण स्वर-साधना से पावन धरा पर सांस्कृतिक चेतना के दीप प्रज्वलित कर दिए। उनकी प्रस्तुति भक्ति और लोक परंपरा का सजीव प्रेम से आह्लादित थी, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने महाकाल थारी होवे आरती… गीत से किया। उनकी शब्द रूपी आराधना से मंदिर परिसर शिव भक्ति की आलोकित आभा से अनुप्राणित हो उठा। इसके पश्चात चौरागढ़ देखन महादेव… की प्रस्तुति श्रोताओं को लोक-आस्था की उस पावन यात्रा पर ले गया, जहाँ श्रद्धा और संस्कृति का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर होता है। भोले बाबा की सजी बारात… के माध्यम से उन्होंने शिव-विवाह की लोककल्पना को जीवंत कर दिया। गीत की लय और शब्दों में निहित लोक चित्रण ने श्रोताओं के मानस-पटल पर शिव बारात का दिव्य दृश्य साकार कर दिया। शिव शंकर की शोभा, काला धतूरा का फूल… में शिव के वैराग्य और अलौकिक सौंदर्य का सशक्त शब्दांकन किया। वहीं, महादेव थारी जटा बीच चंदा चमके… ने शिव की महिमा को काव्यमय आलोक में अभिव्यक्त कर दिया।
      
लोकजीवन की सहजता और भक्तिभाव की अंतरंगता भंगिया पीना छोड़ दे भोला…” से झलकी, तो गौरा संग खेलत फाग… से शिव-गौरा के प्रेम और उत्सवधर्मिता का प्रतिरूपण किया। इन गीतों के माध्यम से मिशा ने लोक संस्कृति की विविध छवियों जैसे वैराग्य, उल्लास, भक्ति और उत्सव को एक सूत्र में पिरो दिया।
    
इसके पश्चात भोपाल की सुश्री अपर्णा चतुर्वेदी एवं साथी कलाकारों द्वारा भगवान शिव पर केंद्रित भावप्रवण प्रस्तुति हुई, जिसमें नृत्य नाटिका के माध्यम से कलाकारों ने शिव कथा को चेतन्य कर दिया। कथक के माध्यम से कलाकारों ने शिव विवाह के पावन दृश्यों को पेश किया। पहली प्रस्तुति शिव वंदना नागेन्द्रहाराया त्रिलोचनाय… की रही। इसके पश्चात शिव विवाह के दृश्य को चले भोले बाबा ब्याह रचाने को… गीत के माध्यम से शिव विवाह के मनोहारी दृश्यों को भावों के माध्यम से पेश किया। ठुमरी के माध्यम से गौरा के श्रृंगार का वर्णन किया तो तराना में गणेश परण कथक के बोल रायगढ़ घराने की बंदिश के माध्यम से पेश की। अंत में भगवान विष्णु के मोहिनी रूप धारण कर भस्मासुर वध की कथा को कथक नृत्य के माध्यम से पेश किया। इसमें इरा सक्सेना ने भगवान शिव की भूमिका निभाई।
    
समारोह की अंतिम कड़ी में भोपाल की सुश्री नवनी श्रीवास्तव एवं साथी कलाकारों ने भक्ति गायन की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति की शुरुआत आदिदेव महादेव की रही जो यमन पर आधारित बंदिश ताल एकताल में निबद्ध रही। उनकी सधी हुई स्वर-लहरियों, भावाभिव्यक्ति की गहनता और शास्त्रीय धुनों की आत्मीयता ने मंदिर परिसर को एक आध्यात्मिक-सांस्कृतिक उत्सव में रूपांतरित कर दिया।  इसके पश्चात ॐ नमः शिवाय… की प्रस्तुति दी, जो राग भूपाली में निबद्ध थी। राग वृंदावनी सारंग पर आधारित बंदिश को एक ताल में पेश करते हुए महादेव शंकर हर… की मनमोहक प्रस्तुति दी।  कार्यक्रम को विस्तार देते हुए एकताल में राग शंकरा पर आधारित बंदिश शंकर भंडार भोले… से श्रोताओं के रोम-रोम को शिव के प्रेम से भर दिया। अंत में पंडित राजन-साजन मिश्र द्वारा रचित भजन जय शिव शंकर की प्रस्तुति के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।

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