RSS: शंकराचार्य विवाद सनातन एकता की मुहिम को प्रभावित कर रहा है… भाजपा नेतृत्व को दिया सन्देश

नई दिल्ली। शंकराचार्य विवाद सनातन एकता की मुहिम को प्रभावित कर रहा है। योगी सरकार हर तरीके से इस मुद्दे को काउंटर करे, ताकि समाज में सनातन को लेकर पॉजिटिव मैसेज जाए। ये विषय लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।’
RSS का ये मैसेज यूपी में BJP के शीर्ष नेतृत्व के लिए है। 6 मार्च को कानपुर में संघ और BJP की मीटिंग हुई। सोर्स बताते हैं कि CM योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई बैठक में यूपी के राजनीतिक माहौल, संगठन में बड़े बदलावों के साथ-साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भी चर्चा हुई।
बैठक में साफ कहा गया है कि शंकराचार्य मामले से सरकार और पार्टी को लेकर पैदा हुई निगेटिविटी दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। ताकि लोगों के बीच ये मैसेज जाए कि सरकार सनातन और संतों के साथ खड़ी है।
मीटिंग से पहले 24 नवंबर 2025 को RSS चीफ मोहन भागवत और CM योगी आदित्यनाथ अयोध्या में मिले थे। इस साल लखनऊ में दोनों के बीच हुई मुलाकातों को संगठनात्मक तालमेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लिहाजा, BJP लीडरशिप को ये मैसेज दे दिया गया है कि विधानसभा चुनाव में योगी ही पार्टी के सबसे बड़े चेहरे होंगे। इसलिए किसी भी तरह की निगेटिव कैंपेनिंग का सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
क्या 2027 विधानसभा चुनाव में शंकराचार्य विवाद BJP की स्ट्रैटजी पर बड़ा इम्पैक्ट डाल सकता है? क्या RSS इस मुद्दे पर योगी के साथ है? ये सवाल हमने दिल्ली और यूपी में RSS से जुड़े पदाधिकारियों, BJP नेताओं और एक्सपर्ट से पूछे।

कानपुर में करीब पौने तीन घंटे मीटिंग
यूपी में RSS का स्ट्रक्चर 6 प्रांतों- पश्चिम, ब्रज, अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर-बुंदेलखंड में बंटा हुआ है। होली के एक दिन बाद कानपुर में RSS और BJP लीडरशिप ने विधानसभा चुनाव को लेकर पहली कोऑर्डिनेशन मीटिंग की। सुबह 11 बजे CM योगी आदित्यनाथ दीनदयाल विद्यालय पहुंचे। उनके साथ BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल भी बैठक में शामिल हुए।
इसमें संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल और प्रांत प्रचारक श्रीराम, डॉ. अनुपम समेत कई सीनियर पदाधिकारी थे। राजनीतिक हलकों में इसे BJP के ‘ट्रिपल-S मॉडल’ यानी सरकार, संगठन और संघ की स्ट्रैटजी मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है। 2019 लोकसभा और 2022 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी इस तरह की कई मीटिंग हुईं थीं, जिसके बाद BJP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली।
RSS के सोर्स बताते हैं, ‘बैठक करीब पौने तीन घंटे चली। इसकी शुरुआत में लोकसभा चुनावों में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी को हुए नुकसान, लोकल नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और बढ़ती अनुशासनहीनता को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए कहा गया। इसके साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़े बदलाव और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई।‘

‘बैठक के दौरान BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री के सामने UGC के नए नियमों के कारण लोगों में असंतोष और शंकराचार्य विवाद का मुद्दा भी उठाया। इस पर संघ का साफ मैसेज था कि ऐसे मुद्दों से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है इसलिए शंकराचार्य मामले को हर तरीके से काउंटर किया जाना चाहिए। ताकि समाज में सनातन धर्म को लेकर पॉजीटिव मैसेज जाए।‘
BJP-संघ की बैठक में क्यों उठा ‘शंकराचार्य’ का टॉपिक
यूपी में RSS और BJP की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘BJP, योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ, जब प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को संगम तक जाने से रोक दिया था। विवाद तब और बढ़ गया, जब उनके अनुयायियों और बटुकों को चोटी खींचकर बुरी तरह मारा गया।‘
इस घटना को लेकर सनातनी समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों ने इसे सरकार की निरंकुशता माना। BJP और संघ को डर है कि एक प्रमुख धार्मिक पीठ के शंकराचार्य का सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने से ब्राह्मण वोट बैंक और कट्टर हिंदू समर्थकों में भ्रम पैदा हो सकता है।
‘विपक्षी दल (जैसे सपा और कांग्रेस) इस विवाद को हवा दे रहे हैं ताकि BJP के हिंदुत्व वाले नैरेटिव को तोड़ा जा सके। यही वजह है कि पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता तक इसे लेकर परेशान हैं।‘
‘शंकराचार्य विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक CM योगी के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। वो जब भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले या फिर कानपुर में जो बात हुई, उसमें शंकराचार्य विवाद को प्रमुखता से रखा गया। इसलिए RSS का रुख साफ है कि अगर अब इस मुद्दे पर पार्टी पीछे हटी तो उसे चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर योगी भी एग्रेसिव नजर आ रहे हैं।‘

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