पटना. नितिन नवीन को बीजेपी ने अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन फिलहाल पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं। अब अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें उच्च सदन में भेजना तय हो गया है। वहीं शिवेश कुमार राम को बीजेपी ने अपना दूसरा उम्मीदवार बनाया है। इसी के साथ सारी अटकलों और अफवाहों पर विराम भी लग गया है।
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर इसी के साथ अपने पूरे पत्ते खोल दिए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने इसको लेकर चिट्ठी जारी कर दी है। इस चिट्ठी में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। बिहार कोटे से राज्यसभा चुनाव के लिए नितिन नवीन का निर्वाचन निर्विरोध होना तय है। इसकी वजह ये है कि बीजेपी संख्याबल के हिसाब से 2 उम्मीदवारों को NDA के विधायकों के वोटों से आराम से राज्यसभा भेज सकती है।
बीजेपी ने इसी तरह से अपना दूसरा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है शिवेश कुमार राम। शिवेश कुमार राम कौन हैं? को बीजेपी ने 2024 में सासाराम से लोकसभा उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। तब कहा गया था कि पवन सिंह की बगावत के चलते सासाराम पर शिवेश कुमार राम जीती हुई बाजी हार गए थे। माना जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें हार के बाद भी वफादारी का इनाम दिया है और अब वो भी निर्विरोध राज्यसभा जाएंगे।
इसी के साथ NDA ने ये भी तय कर लिया है कि पांचवी सीट के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा होंगे। इस तरह से उन अटकलों पर भी विराम लग गया, जिनमें ये कहा जा रहा था कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर देंगे। बीजेपी और JDU ने ये तय कर दिया है कि उपेंद्र कुशवाहा NDA के साझा उम्मीदवार यानी ज्वाइंट कैंडिडेट होंगे और वो अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के बैनर तले ही राज्यसभा चुनाव में ताल ठोकेंगे।
नितिन-शिवेश निर्विरोध, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को करनी होगी फाइट
संख्याबल के लिहाज से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार राम तो आराम से राज्यसभा चले जाएंगे। लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को पांचवी सीट के लिए फाइट करनी होगी। फाइट इसलिए कि पूरे NDA को मिलाकर भी जो वोट बनेंगे वो कुल जमा 38 होंगे। ऐसे में पांचवें NDA उम्मीदवार यानी उपेंद्र कुशवाहा को जीत के लिए 3 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। जाहिर है कि इस बार का राज्यसभा चुनाव उपेंद्र कुशवाहा के लिए निर्विरोध तो हरगिज नहीं दिख रहा। उन्हें राजद यानी महागठबंधन की चुनौती का सामना करना ही पड़ेगा।
