Politics : दिग्विजय-सिंधिया के बीच जमी बर्फ पिघल रही है या… वीडिओ के बाद दिग्गी के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

संजय सक्सेना

भोपाल। एक वीडियो सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। ऐसी तस्वीर लोगों को करीब पांच साल बाद देखने को मिली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का हाथ पकडक़र ज्योतिरादित्य सिंधिया ले जाते हुए दिख रहे हैं। प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया, क्या दोनों नेताओं के बीच जमी बर्फ पिघलने लगी है? या फिर यव सिर्फ राजनीतिक स्टंट था?
दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल स्थित एक निजी स्कूल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। यह स्कूल भोपाल के रतीबड़ इलाके में है। कार्यक्रम में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंच पर बैठे हुए थे। तभी उनकी नजर सामने की ओर कुर्सी पर पड़ी, जहां दिग्विजय सिंह बैठे हुए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया मंच से नीचे उतरे और दिग्विजय सिंह की ओर बढ़े। दिग्विजय सिंह के पास पहुंचने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले हाथ जोडक़र उनका अभिवादन करते हैं। इसके बाद हाथ पकडक़र उन्हें मंच पर ले जाते हैं। इस पल को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। कार्यक्रम में मौजूद मीडियाकर्मियों के कैमरे उनकी ओर घूम जाते हैं।
इस घटना की चर्चाओं का दौर चल निकला, इस बीच ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पत्रकारों ने भोपाल की घटना को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी। दिग्विजय सिंह ने कह दिया- केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मेरे पुत्र के समान हैं, भले ही वह कांग्रेस छोडक़र भाजपा में चले गए हों। उनके पिता माधवराव सिंधिया के साथ मैंने काम किया है और पार्टी ने उनका सम्मान किया था। पूर्व मंत्री के संगठन मोहब्बत की दुकान के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे दिग्विजय ने यह भी कहा कि पूर्व में उन्होंने मंच पर न बैठने की बात कही थी और वह कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों के लिए थी। वह बयान निजी कार्यक्रमों को लेकर नहीं था।
कुल मिलाकर वीडियो और फिर दिग्विजय सिंह के बयान ने प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं में एक मोड़ तो ला ही दिया है। असल में प्रदेश की राजनीति में पांच साल बाद ऐसा नजारा दिखा, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह साथ दिखे हो। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था। उनके साथ कांग्रेस के 22 विधायक भी चले गए थे और कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। उस समय दिग्विजय सिंह खुलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया पर वार कर रहे थे। ग्वालियर-चंबल में चुनाव की कमान भी उनके बेटे जयवर्धन सिंह के पास थी। उन्होंने भी सिंधिया पर बयानी हमले किये। दूसरी तरफ, ज्योतिरादित्य सिंधिया भी खुलकर दोनों पर वार करते रहे हैं। लेकिन अचानक एक कार्यक्रम में नीचे बैठे दिग्विजय को मंच पर ले जाने के वीडियो ने जहां सिंधिया की सदाशयता का प्रदर्शन तो किया ही, नई चर्चा को जन्म दे दिया। वहीं दिग्विजय सिंह के सधे हुये जवाब ने भी राजनीतिक गलियारों की हवाओं में तल्खी कम करने का प्रयास तो किया ही है।

कुछ भी हो, वर्तमान में भाजपा और कांग्रेस में जो अंदरूनी हलचल मची हुई है, उसमें दोनों ही नेता कहीं ना कहीं उपेक्षित से ही दिख रहे हैँ। दिग्विजय अपने बेटे जयवर्धन को जमाने में लगे हैँ, तो ज्योतिरादित्य अपनी ज़मीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैँ। कहाँ सिंधिया 22 विधायकों को लेकर बीजेपी में शामिल हुए थे और कहाँ अब उनके मात्र तीन सहयोगी ही कैबिनेट में बचे हैँ। निगम मण्डलों में अपने समर्थकों की नियुक्ति के लिए उन्हें एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

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आगे क्या होता है, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जिस तरह से पक्ष-विपक्ष के बीच कड़वाहट बढ़ती जा रही है, ऐसे माहौल में दिग्विजय और सिंधिया के बीच घटी इस घटना ने राजनीति में बदलाव का संदेश तो दे ही दिया है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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