MP : अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया भाजपा विधायक संजय पाठक ने..! विधानसभा में आये जवाब पर उठाये सवाल

भोपाल। सिहोरा में अवैध माइनिंग का मामला तूल पकड़ चुका है। विधानसभा में मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर अवैध खनन का मामला मानते हुए जांच के बाद साढ़े चार सौ करोड़ की पेनाल्टी बताई है, इस पर कम्पनी के मुखिया भाजपा विधायक संजय पाठक ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने जांच पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री पर ही निशाना साधा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संजय पाठक सीएम के निशाने पर हैँ, इसके पीछे मोहन यादव के खिलाफ चली मुहिम बताई जा रही है। इधर संजय पाठक भी दिल्ली से सीधे सम्पर्क साधने में जुटे हैँ।
एक अख़बार से चर्चा करते हुए संजय पाठक ने कहा है कि अभी जो रिपोर्ट पेश की गई है वो एक अनुमान के आधार पर प्रस्तुत की गई है। कि वर्तमान में इतना प्रोडक्शन है तो पहले इतना प्रोडक्शन हुआ होगा। 90 साल पुरानी खदान का सैटेलाइट इमेज से सर्वे नहीं किया जा सकता।हमारे परिवार का व्यापार का 125 वर्ष पुराना इतिहास रहा है। और 1910 से लगभग 115 साल से हम लोग माइनिंग में हैं। और वर्ल्ड मिनरल बुक में सीएल पाठक एंड संस हमारी फर्म का नाम है।
ये जिस माइंस की बात कर रहे हैं। इस माइंस को हम लोग खुद 70-75 साल से चला रहे हैं। और इन्होंने कहा कि चार-पांच सौ एकड़ में फैली खदान को सिर्फ दो महीनों में नाप दिया। ये संभव नहीं हैं।
हमने मुख्यमंत्री जी से अनुरोध किया है और पीएस माइनिंग को भी लिखकर कंपनी ने दिया है कि एक पक्षीय कार्रवाई न हो। हमारी कंपनियों के पक्ष को भी सुना जाए। मुझे विश्वास है कि जब रिकॉर्ड देखेंगे तो दूध का दूध पानी का पानी निकलेगा।
विधानसभा में दिया गया जवाब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दिए गए जवाब में बताया है कि जबलपुर के सिहोरा में आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट द्वारा स्वीकृत मात्रा से अतिरिक्त खनन किया गया। इसके बावजूद शासन को 1,000 करोड़ रुपए की राशि जमा नहीं की गई। इसकी शिकायत आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से ईओडब्ल्यू में 31 जनवरी 2025 को की गई थी।
शिकायत के आधार पर मप्र खनिज साधन विभाग ने 23 अप्रैल को एक जांच दल गठित किया था। जांच दल ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें तीनों खनन कंपनियों पर 443 करोड़ 4 लाख, 86 हजार 890 रुपए की वसूली निकाली है। इस राशि पर जीएसटी की वसूली अगल से तय की जाएगी। सरकार ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री का जवाब गलत..?
संजय पाठक ने जो भी कहा, उससे एक तो विधानसभा में दिए जाने वाले जवाबों की सत्यता पर संदेह पैदा होता है। ऐसे आरोप आम तौर पर विपक्षी सदस्य लगाते हैँ। दूसरे, अवैध माइनिंग का जवाब मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया था। मुख्यमंत्री के पास खनिज विभाग भी है। और जांच उनके विभाग द्वारा ही की गई है। यानि साफ है कि पाठक ने मुख्यमंत्री पर ही निशाना साधा है। उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है।
कई मामलों में उलझे हुए हैँ पाठक
संजय पाठक कि बात करें तो वे कई मामलों में उलझे हुए हैँ। सहारा ज़मीन घोटाले में भी इनका नाम है, क्योंकि जिन ज़मीनों के बेचे जाने का केस EOW में दर्ज हुआ है, वो इन्हीं की हैँ। इसके अलावा आदिवासियों के नाम पर फर्जी तरीके से ज़मीनें ख़रीदे जाने का भी मामला जांच में चला गया है। ये डिंडोरी जिले का मामला है, जहाँ बॉक्साइट की खदाने हैँ। एक रिसोर्ट की ज़मीन भी आदिवासी के नाम पर खरीदी गई थी। फर्जी खाते खुलवाने और कई लोगों को प्रताड़ित करने के भी कई मामले चल रहे हैँ।





