MP : पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उद्योग और आम जनता पर बढ़े बोझ को लेकर मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उद्योग और आम जनता पर बढ़े बोझ को लेकर मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है और अनुरोध किया है कि उन्हें समस्याओं से निजात दिलाई जाये।
पटवारी ने पत्र में लिखा है – मैं आपके संज्ञान में प्रदेश के उद्योगों और आम जनता पर तेजी से बढ़ते आर्थिक दबाव का अत्यंत गंभीर विषय ला रहा हूं!
हाल ही में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स एवं उद्योग संगठनों द्वारा यह संकेत दिया गया है कि 01 अप्रैल 2026 से रोजमर्रा की वस्तुओं, विशेषकर ब्रेड, बिस्किट, जूते-चप्पल, साबुन एवं अन्य FMCG उत्पादों, की कीमतों में 20% से 25% तक वृद्धि की संभावना है! उदाहरणस्वरूप, ₹30 का ब्रेड ₹35 तक और ₹5 का बिस्किट ₹6 तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है!
यह केवल सामान्य मूल्य वृद्धि नहीं, एक व्यापक आर्थिक दबाव का परिणाम है, जिसे आपकी सरकार अब तक गंभीरता से लेने में विफल दिखाई देती है। उद्योगों से प्राप्त संकेतों और रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ आंकड़ों से आपका परिचय होना भी आवश्यक है।
1. कच्चे माल की लागत में असामान्य वृद्धि
पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल जैसे प्लास्टिक, केमिकल एवं सॉल्वेंट की कीमतों में कई मामलों में दोगुनी से तीन गुना तक वृद्धि की शिकायतें सामने आई हैं।
2. ऊर्जा और उत्पादन लागत पर दबाव
LPG, बिजली एवं परिवहन लागत में निरंतर वृद्धि के कारण उद्योगों की कुल उत्पादन लागत पर गंभीर असर पड़ा है। उद्योग जगत का अनुमान है कि लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन टिकाऊ रखना चुनौती बन गया है।
3. औद्योगिक इकाइयों पर संकट
विभिन्न औद्योगिक संगठनों के अनुसार, सैकड़ों इकाइयां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही हैं और हजारों करोड़ रुपये के कारोबार पर दबाव है, विशेषकर फुटवियर और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में।
4. जनता पर दोहरी मार
बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं और पैकेट का आकार घटाकर “कम मात्रा, अधिक कीमत” का मॉडल अपना रही हैं, जिससे आम उपभोक्ता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह पूरा संकट धीरे-धीरे गहराता जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस हस्तक्षेप या राहत नीति सामने नहीं आई है।
क्या आपकी सरकार केवल महंगाई के आंकड़े देखने तक सीमित रहेगी, या फिर प्रदेश के उद्योगों और जनता को राहत देने के लिए कोई निर्णायक कदम उठाएगी? क्या निम्न तीन बुनियादी बिंदु नजरअंदाज किए जा सकते हैं?
– छोटे एवं मध्यम उद्योग (MSME) बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं!
– देश के प्रमुख बेरोजगार राज्यों में शामिल मप्र में रोजगार प्रभावित हो सकते हैं!
– इस महंगाई का सीधा बोझ आम जनता की रसोई पर भी पड़ेगा, स्वाभाविक है गरीब परिवार सबसे ज्यादा पीड़ित/प्रभावित होंगे!
मेरी आपसे मांग है कि,
1. प्रभावित उद्योगों के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज की तत्काल घोषणा की जाए।*
2. MSME क्षेत्र को बिजली दरों एवं करों में तत्काल अस्थायी राहत प्रदान की जाए।*
3. कच्चे माल एवं परिवहन लागत पर राज्य स्तर पर हस्तक्षेप कर राहत-तंत्र विकसित किया जाए।*
4. कार्य एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए उद्योगों के लिए सुलभ दरों पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध करवाई जाये।
5. आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण हेतु सक्रिय निगरानी एवं हस्तक्षेप प्रणाली लागू की जाए।
मैं यह भी स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह समय औपचारिक बयान देने का नहीं, ठोस निर्णय लेने का है। यदि सरकार अब भी निष्क्रिय रहती है, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि उसे न उद्योगों की चिंता है और न ही आम जनता की।





