MP : पटवारी ने सीएम-पूर्व गृहमंत्री की मुलाकातों पर उठाए सवाल, सागर के नीलेश आदिवासी हत्याकांड की जांच को प्रभावित करने के लगाए आरोप

भोपाल। सागर के नीलेश आदिवासी आत्महत्या कांड में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुलाकातों और सार्वजनिक रूप से मंच साझा करने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने एक्स पर लिखा है कि क्या मुख्यमंत्री पूर्व गृहमंत्री के बुलावे पर उनसे लगातार मुलाकातें करके आरोपी पूर्व गृहमंत्री को बचाना चाहते हैं या एसआईटी पर किसी तरह का दबाव बनाना चाहते हैं। यह सवाल भी उठाया है कि क्या सही जांच करने के बजाय इसी के चलते एसआईटी बार-बार सुप्रीम कोर्ट से समय मांग रही है।
पटवारी ने पूछा- क्या पूर्व गृह मंत्री को जांच से बचा रहे
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एक्स पर लिखा है कि क्या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने ‘आरोपी पूर्व गृह मंत्री’ को SIT की जांच से बचा रहे हैं? पटवारी के अनुसार सागर के नीलेश आदिवासी आत्महत्या कांड में देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा उच्च स्तरीय जांच के लिए SIT बनाने के बाद आखिर मुख्यमंत्री मोहन यादव का भूपेंद्र प्रेम क्यों अचानक जाग उठा?
क्या यह सारी दोस्ती जांच को दबाने की साजिश है? पटवारी ने लिखा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर के अपने आदेश में ही प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री का नाम लेकर निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन कर दिया, तब मुख्यमंत्री आरोपी पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह के बुलावे पर खुरई क्यों पहुंचे और अब उनके आमंत्रण पर निजी कार्यक्रम में सागर क्यों जा रहे हैं? क्या यह सब जांच को प्रभावित करने की घिनौनी चाल है?
क्या SIT अब नीलेश आदिवासी और पंकज आदिवासी केस में निष्पक्ष जांच कर पाएगी या राजनीतिक दबाव में सब कुछ दबा दिया जाएगा? पटवारी ने सवाल किया है कि क्या इसी वजह से SIT अभी तक अपनी जांच पूरी नहीं कर पाई है और सुप्रीम कोर्ट में जांच पूरी करने के लिए बार बार समय मांग रही है? आखिर कौन से बड़े हाथ जांच को अटकाने का प्रयास कर रहे हैं? मध्य प्रदेश की जनता को स्पष्ट जवाब चाहिए।
कटारे ने लिखा- ऐसे में SIT सही जांच कैसे कर पाएगी
दूसरी ओर, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने भी एक्स पर ट्वीट कर कहा है कि सागर के नीलेश आदिवासी आत्महत्या मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए SIT बनाई है, उसी समय मध्य प्रदेश सरकार के बड़े नेता आरोपी के साथ मंच पर नजर आते हैं।
यह न्याय प्रक्रिया में दखल देने जैसा है। अब सवाल उठता है कि क्या SIT सही से और निष्पक्ष जांच कर पाएगी? आदिवासी परिवारों को सिर्फ न्याय चाहिए, सत्ता का संरक्षण नहीं। कटारे ने लिखा है कि मुख्यमंत्री को साफ बताना होगा कि वे संविधान और कोर्ट के साथ हैं या आरोपी के साथ हैं।




