MP : राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त नेता सीताराम आदिवासी की व्यथा- बैठक में नहीं बुलाते,  कलेक्टर के बगल में रामनिवास बैठते हैं, सीएम भी उन्हीं को तवज्जो देते हैं

भोपाल। मध्यप्रदेश सहरिया विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी का दर्द छलका है। सीताराम कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत से परेशान हैं। उन्होंने कहा- मैं वर्तमान में मंत्री हूं। इसके बावजूद न तो बैठकों में बुलाया जा रहा और न ही कोई सम्मान दिया जा रहा है। जबकि रावत को हर स्तर पर तवज्जो मिल रही है।
सीताराम ने कहा कि हाल ही में जिले में हुई बैठक में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। जब वे पिछली बैठक में गए थे, तो वहां भी उनका कोई सम्मान नहीं हुआ।
कलेक्टर के बगल में रामनिवास को बैठाया, जबकि मैं मंत्री हूं
सीताराम ने कहा कि हाल ही में जिले में हुई बैठक में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। जब वे पिछली बैठक में गए थे, तो वहां भी उनका कोई सम्मान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर के बगल में रामनिवास रावत को बैठाया गया, जबकि परंपरा के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष और वर्तमान मंत्री को वह स्थान मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रभारी मंत्री भी आए थे, लेकिन उन्होंने भी केवल रामनिवास की ही बात सुनी।
उन्होंने रघुनाथपुर और भमपुरा क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में सोलर पंप और सोलर प्लांट के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। सीताराम ने कहा कि जिन जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने की कोशिश हो रही है, वहां आदिवासी वर्षों से खेती कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आदिवासियों की जमीन पर ही क्यों परियोजनाएं थोपी जा रही हैं, क्या और कहीं जमीन नहीं है?
रामनिवास को प्राथमिकता दे रहे सीएम और प्रभारी मंत्री
सीताराम ने तीखे शब्दों में कहा कि वे वर्तमान में मंत्री हैं, जबकि रामनिवास रावत किसी पद पर नहीं हैं, इसके बावजूद मुख्यमंत्री, कलेक्टर और प्रभारी मंत्री सभी उन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि मुख्यमंत्री बार-बार रामनिवास को तवज्जो क्यों दे रहे हैं, जबकि क्षेत्र में उनकी कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है।

लोकसभा चुनाव में आदिवासियों ने बीजेपी केंडिडेट को जिताया
लोकसभा चुनाव को लेकर भी सीताराम ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रामनिवास ने नहीं, बल्कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के आदिवासियों ने सांसद को जिताया है। उन्होंने दावा किया कि रावत समाज के 10-15 हजार वोटों से चुनाव नहीं जीता जा सकता, बल्कि पूरे ट्राइबल क्षेत्र के आदिवासियों ने एकजुट होकर मतदान किया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री बार-बार रामनिवास को श्रेय दे रहे हैं।
मुझे टिकट नहीं दिया तो आदिवासी नाराज हो गए
सीताराम ने कहा कि विजयपुर, जौरा और बमोरी जैसी 10-15 विधानसभा सीटें आदिवासी वोटों से ही तय होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्हें टिकट नहीं दिया गया, तो आदिवासी नाराज हो गए और पूरी सीट हार गई। उपचुनाव में उन्होंने पूरी ताकत लगाई, लेकिन मुख्यमंत्री के बार-बार दौरे के बावजूद चुनाव नहीं जीता जा सका। उन्होंने कहा कि अगर किसी के कर्म ही खराब हों, तो उसमें वे क्या कर सकते हैं।
रामनिवास की वजह से क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा
सीताराम ने आरोप लगाया कि रामनिवास की वजह से पूरे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनिवास जनता का काम नहीं करते, सिर्फ जमीन के पीछे पड़े रहते हैं और आदिवासियों की जमीनों पर दबाव बनवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही रामनिवास किसी पद पर न हों, लेकिन मुख्यमंत्री का पूरा संरक्षण उन्हें हासिल है।
सहरिया विकास प्राधिकरण को नहीं दे रहे बजट
सीताराम ने यह भी आरोप लगाया कि सहरिया विकास प्राधिकरण के लिए बजट नहीं दिया जा रहा, जबकि रामनिवास से जुड़े हर प्रस्ताव पर तुरंत दस्तखत हो जाते हैं। सीताराम ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी की छवि लगातार खराब हो रही है।
सीएम ने मुझसे कहा कि तुमने उपचुनाव हरवाया
सीताराम आदिवासी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी पीड़ा साझा की, लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे ही कह दिया कि उपचुनाव उन्होंने हराया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री खुद दस बार क्षेत्र में गए, तो हार का ठीकरा उनके सिर क्यों फोड़ा जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है रामनिवास ने ही मुख्यमंत्री को उनके खिलाफ भड़का दिया हो।
सीताराम ने अंत में कहा कि वे पार्टी में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन जब मंत्री होने के बावजूद उनका सम्मान नहीं किया जा रहा, तो यह न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की उपेक्षा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की राजनीति से पार्टी को आने वाले समय में भारी नुकसान हो सकता है।


नेता प्रतिपक्ष बोले-सीताराम ने असल स्थिति बयां की

सीताराम आदिवासी के बयान पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सीताराम जी ने भाजपा की सरकार में आदिवासियों की उपेक्षा और प्रताड़ना की असली तस्वीर बताई है। सरकार ने मंत्री का दर्जा तो दे दिया लेकिन न तो उन्हें अधिकार दिए, न बजट दिया और न ही सम्मान दे रहे। जब सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष को ही सरकार और मंत्री, अफसर सम्मान नहीं दे रहे तो समाज के लोगों को कहां सम्मान दिला पाएंगे।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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