डीपीई कार्यालय में टेंडर सिंडिकेट, घोटालों एवं सरकारी संरक्षण पर कांग्रेस का खुलासा
भोपाल।मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी जी ने कहा कि प्रदेश में व्याप्त टेंडर सिंडिकेट और भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस लगातार आवाज़ उठाती रही है। अंततः कांग्रेस के दबाव के बाद मोहन यादव सरकार को जागना पड़ा और प्रमुख सचिव द्वारा सिंडिकेट से जुड़े सरकारी अधिकारियों पर कार्यवाही करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए गए तथा 149 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच प्रारंभ कराई गई।
श्री पटवारी ने कहा कि वर्ष 2023 में खरीदे गए 3500 कंप्यूटर एवं अन्य उपकरण, जिन्हें बाजार मूल्य से लगभग 250% अधिक कीमत पर खरीदा गया, उस प्रकरण पर भी संज्ञान लिया गया। इस संबंध में लोकायुक्त में शिकायत होने के बावजूद, सिंडिकेट के कथित सरगना “शर्मा बंधु” को संरक्षण देना मोहन सरकार की मजबूरी बन गई, जिसके चलते बिना निष्पक्ष जांच के प्रकरण को बंद कर दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2024-25 में डीपीई कार्यालय में शिल्पी गुप्ता एवं संजय गोयल के संरक्षण में जिला स्तर पर इंटरैक्टिव पैनल खरीदी हेतु टेंडर जारी किए गए। इन टेंडरों में तकनीकी शर्तों की अनदेखी करते हुए एसर कंपनी से लगभग ₹60,000 मूल्य के पैनल ₹1,20,000 में खरीदे गए और जल्दबाजी में भुगतान भी कर दिया गया, जबकि कंपनी स्वयं टेंडर की शर्तों को पूरा नहीं करती थी। इस संबंध में विभागीय मंत्री एवं प्रमुख सचिव को कई शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
उन्होंने कि वर्ष 2025-26 में स्मार्ट क्लास हेतु इंटरैक्टिव पैनल की केंद्रीय खरीद में भी भंडार क्रय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जिन पैनलों की कीमत GEM पोर्टल पर लगभग ₹70,000 थी, वही LG और सैमसंग के पैनल ₹1,14,000 प्रति यूनिट की दर से सिंडिकेट से जुड़ी कंपनियों को आवंटित किए गए। यह स्पष्ट रूप से सरकारी नियमों का उल्लंघन है।
इसके अलावा, वर्ष 2026 में ₹275 करोड़ के 27,000 कंप्यूटर एवं ICT लैब उपकरणों की केंद्रीय खरीद के टेंडर में भी केवल तीन कथित सिंडिकेट कंपनियों—हेवन टेक्नोलॉजी, कोविनेंट और नेक्स्टजिन—को तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया, जबकि अन्य सभी विक्रेताओं को अनुचित तरीके से अयोग्य ठहराया गया।
उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा तंत्र अश्विन नाटू, सौरभ शर्मा और गौरव शर्मा से जुड़े सिंडिकेट के संरक्षण में संचालित हो रहा है, जिसे सरकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है।
अंत में श्री पटवारी ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसके कई चौंकाने वाले खुलासे अभी होना बाकी हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर कब तक मोहन सरकार भ्रष्टाचार रूपी नाग को पालती रहेगी और प्रदेश के बच्चों के अधिकारों से समझौता करती रहेगी।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी मांग करती है कि:
1. पूरे प्रकरण की न्यायिक या उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
2. सभी दोषी अधिकारियों एवं संबंधित कंपनियों पर सख्त कार्यवाही हो।
3. टेंडर प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जाए।
MP : डीपीई बना घोटालों का केंद्र, महंगे सौदों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान — जीतू पटवारी
