MP : राज्यसभा चुनाव में बीजेपी खेल सकती है सवर्ण कार्ड..?कांग्रेस में असमंजस

भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव सिर्फ तीन सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक-सियासी संदेश देने की लड़ाई बनता जा रहा है। इस बार मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि बीजेपी अपनी दो पारंपरिक सीटों के अलावा कांग्रेस की संभावित सीट पर भी नजर गड़ाए हुए है। इधर कांग्रेस में जहाँ टिकट को लेकर असमंजस है, वहीं क्रॉस वोटिंग का डर भी बना हुआ है।
बीजेपी की रणनीति: ‘सवर्ण कार्ड’ के जरिए नया संतुलन
पिछले कुछ वर्षों में Shivraj Singh Chouhan और बाद में Mohan Yadav के दौर में बीजेपी ने ओबीसी, एससी, एसटी और महिला प्रतिनिधित्व पर खास फोकस किया। अब पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत हुई है कि सवर्ण वर्ग, खासकर ठाकुर और ब्राह्मण नेतृत्व को फिर से प्रमुख प्रतिनिधित्व दिया जाए।

बीजेपी में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
अरविन्द भदौरिया और कान्तदेव सिंह।
कांतदेव सिंह को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है। विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में उनकी सक्रियता और संघ पृष्ठभूमि उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। वहीं अरविंद भदौरिया को संगठन और सत्ता दोनों का अनुभव है। 2020 में Jyotiraditya Scindia के साथ कांग्रेस विधायकों के बीजेपी में आने की पूरी राजनीतिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एससी-एसटी समीकरण भी साधने की कोशिश
बीजेपी पूरी तरह सवर्ण फोकस पर नहीं जा रही। पार्टी सामाजिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
संभावित नाम:
Lal Singh Arya — चंबल क्षेत्र और एससी वोट बैंक को ध्यान में रखकर।
Ranjana Baghel — आदिवासी महिला चेहरा।
Sumer Singh Solanki — दोबारा मौका मिलने की चर्चा।
George Kurian — केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद नेता के तौर पर रिपीट होने की संभावना।

तीसरी सीट क्यों बनी हाई-वोल्टेज मुकाबला?
राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित विधानसभा संख्या बल पर आधारित होता है। मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास एक सीट निकालने लायक संख्या मौजूद है, लेकिन क्रॉस वोटिंग का डर उसकी सबसे बड़ी चिंता है।
कांग्रेस की चिंता के पीछे कई कारण हैं:
कुछ विधायक बीजेपी कार्यक्रमों या संघ से जुड़े आयोजनों में दिखे हैं।
कुछ नेताओं की संगठन से दूरी बढ़ी है।
एक सीट खाली है और एक विधायक के मतदान अधिकार पर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

क्या कांग्रेस से आए नेता को टिकट मिल सकता है?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा Suresh Pachouri के नाम की है। वे लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और अब बीजेपी में हैं। दोनों दलों में उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे माने जाते हैं। बीजेपी अगर उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो यह कांग्रेस के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव भी होगा।

कांग्रेस की रणनीति: विधायकों को एकजुट रखना
कांग्रेस के भीतर भी संभावित नामों को लेकर मंथन जारी है। इनमें प्रमुख हैं:
Kamal Nath
Jitu Patwari
Arun Yadav
Kamaleshwar Patel
Meenakshi Natarajan

कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि यदि कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता मैदान में आते हैं तो विधायकों को एकजुट रखना आसान होगा।
उधर Umang Singhar लगातार आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी जांच एजेंसियों और पुराने मामलों का दबाव बनाकर कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

असली लड़ाई संख्या से ज्यादा संदेश की
इस चुनाव का राजनीतिक महत्व सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है।
अगर बीजेपी तीसरी सीट जीतती है, तो यह कांग्रेस संगठन की कमजोरी का बड़ा संकेत माना जाएगा।
अगर कांग्रेस अपनी सीट बचा लेती है, तो यह संदेश जाएगा कि पार्टी अभी भी मध्य प्रदेश में लड़ाई की स्थिति में है।
बीजेपी के लिए यह चुनाव 2028 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों की टेस्टिंग भी है।
यानी राज्यसभा चुनाव भले अप्रत्यक्ष हो, लेकिन इसका असर सीधे मध्य प्रदेश की भविष्य की राजनीति पर दिखाई देगा।

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