Maharashtra : अजित पवार के न रहने पर बदलेगी तस्वीर, चाचा शरद पवार ही लेंगे NCP के फैसले?  क्या होगी आगामी रणनीति?

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के जाने से ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसका भरना मुश्किल है। लेकिन उसके चलते हलचलें तेज हो सकती हैं और एनसीपी के भविष्य को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है। कयास यहां तक लग रहे हैं कि एनसीपी में भविष्य में एकता होगी तो शरद पवार खेमे को फिर से लीडरशिप मिल सकती है। यही नहीं इसी के चलते एकता के प्रयास फिलहाल टाले भी जा सकते हैं क्योंकि अजित पवार गुट का कोई भी नेता नहीं चाहता कि शरद पवार खेमे का सिक्का चले। ऐसी स्थिति में आने वाले कुछ महीने एनसीपी के लिए अहम होंगे और देखना होगा कि हालात कैसे बदलते हैं।
अजित पवार के अंतिम संस्कार के मौके पर पूरा परिवार पहुंचा था। शरद पवार भावुक थे तो सुनेत्र पवार की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। अजित के दोनों बेटे जय और पार्थ पिता की अर्थी के साथ-साथ चल रहे थे। अमित शाह, नितिन गडकरी समेत तमाम बड़े नेता बारामती पहुंचे और शरद पवार एंड फैमिली को ढांढस बंधाते दिखे। परिवार एक नजर आया, लेकिन राजनीति की बात आएगी तो यह एकता कितनी बनी रहेगी, यह एक सवाल है। दिलचस्प आंकड़ा यह है कि एक तरफ अजित पवार खेमे के पास महाराष्ट्र में 41 विधायक हैं तो वहीं शरद पवार के पास लोकसभा में 8 सांसद हैं।
एक अहम बात यह भी है कि एकता की स्थिति में भी अजित पवार खेमा नहीं चाहेगा कि सत्ता से बाहर निकले। महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार खेमा काफी सहज स्थिति में है। ऐसे में बनी हुई सरकार के बीच से निकलना आसान नहीं होगा। इसलिए अजित पवार खेमे का जोर इस बात पर रहेगा कि मिलकर सत्ता में रहा जाए। अब शरद पवार इसके लिए तैयार होते हैं या नहीं। यह देखना होगा। चर्चा है कि अजित पवार खेमा सुनेत्र पवार को डिप्टी सीएम पद के लिए राजी कर रहा है। उनके स्थान पर बेटे या फिर किसी और नेता को राज्यसभा भेजा जा सकता है। सुनेत्र के अलावा प्रफुल्ल पटेल को भी डिप्टी सीएम बनाने की अटकलें हैं, लेकिन परिवार के बाहर किसी विकल्प पर सहमति बनना मुश्किल ही है।
सत्ता से बाहर निकली NCP तो क्या होगी फडणवीस सरकार की स्थिति?
यदि एनसीपी सत्ता से बाहर निकलती है तो देवेंद्र फडणवीस की सरकार को कोई परेशानी नहीं होगी। वजह यह कि अकेले भाजपा के पास ही 132 विधायक हैं और जादुई आंकड़ा 145 का ही है। शिवसेना के पास भी विधायकों की अच्छी संख्या है। ऐसी स्थिति में कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन एकनाथ शिंदे का दबाव जरूर बन जाएगा। ऐसे में भाजपा और एनसीपी दोनों ही चाहेंगे कि उनके रास्ते अलग हों। इसके अलावा 2024 में दोनों के गठबंधन के बाद भी जनता ने अच्छा समर्थन दिया है। स्पष्ट है कि मतदाताओं में भी इस गठबंधन को लेकर कोई असहजता नहीं है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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