Dhankhad : सरकार श्रेय लेना चाहती थी और जगदीप धनखड़ ने एक नहीं सुनी, सरकार का पूरा प्लान बदल डाला?

नई दिल्ली। ऐसा कैसे हो सकता है कि सरकार किसी मामले का श्रेय लेना चाहे, पर कोई और ले ले..? लेता है तो..? उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे से इस्तीफ़ा देना पड़ जाता है..! जी हां, ऐसा ही कुछ सामने आ रहा है।  केंद्रीय मंत्रियों किरेन रिजिजू और जगत प्रकाश नड्डा ने जगदीप धनखड़ से संपर्क साधा था। खबर है कि इस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव स्वीकारने पर बात हुई थी। कहा जा रहा है कि विपक्ष के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के चलते ही धनखड़ से सरकार नाराज थी। हालांकि इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस्तीफा देने की बात कही है।

जानकार बताते हैं, ‘रिजिजू ने धनखड़ से कहा था कि लोकसभा में महाभियोग पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही कहा था कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने संकेत दिए कि प्रधानमंत्री इस घटनाक्रम से खुश नहीं हैं।’ सूत्रों ने बताया कि धनखड़ ने संकेत दिए कि उन्होंने सदन के नियमों के तहत सब किया है।

असल बात ये है कि ‘सरकार पहले लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहती थी। इसे सरकार की सफलता के रूप में देखा जाता और न्यायपालिका को स्पष्ट संदेश जाता, लेकिन धनखड़ ने श्रेय छीन लिया।’ लोकसभा के एक अधिकारी ने एक बड़े अख़बार से ये बात साझा की है।

सरकार की बात नहीं माने धनखड़?
एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि रिजिजू के अलावा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति से इंतजार करने को कहा था। मंत्रियों का कहना था कि साझा महभियोग प्रस्ताव को लेकर आम सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। लेकिन ओस बीच रिपोर्ट के अनुसार, धनखड़ ने घोषणा कर दी कि उन्हें राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर मिल गए हैं। कहा जा रहा है केंद्र के बार-बार याद दिलाने के बाद भी धनखड़ ने ऐसा कदम उठाया।

रिपोर्ट के अनुसार मॉनसून सत्र शुरू होने के चार से पांच दिन पहले ही रिजिजू ने उपराष्ट्रपति को जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की केंद्र की तैयारियों के बारे में बताया था। धनखड़ को बताया गया था कि ऐसा ही प्रस्ताव राज्यसभा में भी लाया जाएगा। मॉनसून सत्र की शुरुआत होने के एक दिन पहले और धनखड़ के अचानक राज्यसभा छोड़ने से पहले भी रिजिजू ने पूर्व उपराष्ट्रपति को यह जानकारी दी थी।उस समय तक सरकार विपक्षी सांसदों समेत अन्य सदस्यों के जरूरी हस्ताक्षर निचले सदन में हासिल कर चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार, इधर धनखड़ रविवार और सोमवार को विपक्ष के नेताओं से मिले और जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर चर्चा की। हालांकि, धनखड़ ने विपक्ष के नेताओं के साथ हुई बातचीत पर चुप्पी नहीं तोड़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार की सुबह तक यह साफ हो गया था कि उपराष्ट्रपति ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से मुलाकात की है और विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर औपचारिक रूप से स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं। चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, तब तक सरकार उपराष्ट्रपति से तीन बार बात कर चुकी थी, जिसमें कहा गया था कि हस्ताक्षर में सत्तारूढ़ दल के सांसदों को भी शामिल किया जाए, क्योंकि एजेंडा आम सहमति से तय हुआ है।

यहां बिगड़ी बात

उपराष्ट्रपति से पहले नड्डा और रिजिजू ने मुलाकात की। बाद में रिजिजू और मेघवाल उनसे मिलने पहुंचे और तीसरी बार सिर्फ मेघवाल धनखड़ से मिले। इस तीसरी मुलाकात में बताया गया कि सरकार को भी भरोसे में लिया जाना चाहिए और सत्तारूढ़ दल के सांसदों के हस्ताक्षर भी जरूरी हैं। खबर है कि उपराष्ट्रपति नहीं माने और सरकार को कोई आश्वासन नहीं दिया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साफ संकेत दिए कि वह सदन में विपक्षी सांसदों की सूची पढ़ेंगे। बस यही बात सरकार को खल गई।

धनखड़ ने सामान पैक करना शुरू किया
धनखड़ ने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया है और वह जल्द ही उपराष्ट्रपति एन्क्लेव खाली करेंगे। पीटीआई भाषा को सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। धनखड़ पूर्व उपराष्ट्रपति होने के नाते सरकारी बंगले के हकदार हैं। सूत्रों ने बताया कि धनखड़ दंपति ने मंगलवार को अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही सरकारी आवास को खाली करेंगे। धनखड़ पिछले साल अप्रैल में संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड पर नवनिर्मित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में स्थानांतरित हो गए थे।
शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा, ‘उन्हें (धनखड़ को) लुटियंस दिल्ली या किसी अन्य क्षेत्र में टाइप-8 बंगला देने की पेशकश की जाएगी।’ टाइप-8 बंगला आमतौर पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों या राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों को आवंटित किया जाता है। धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोमवार को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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