Congress : भंवर जितेंद्र मप्र में बना रहे थे अपनी कांग्रेस, बड़े नेताओं की नाराजगी भारी पड़ी, नटराजन को तेलंगाना का प्रभार

भोपाल। कांग्रेस में कल प्रभारियों के फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के प्रभारी भंवर जितेन्द्र सिंह को हटाए जाने की हो रही है। जितेन्द्र सिँह राहुल परिवार के करीबी थे, लेकिन उन्होंने न केवल मप्र में नियुक्तियों में मनमानी की, अपितु प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था। वो राज्य में अपनी अलग ही कांग्रेस बना रहे थे।

कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को बड़ा फेरबदल किया। 11 राज्यों में नए प्रभारी नियुक्त किए हैं। करीब छह पदाधिकारियों की छुट्टी भी कर दी गई है। मध्यप्रदेश प्रभारी जितेन्द्र सिंह की जगह अब हरीश चौधरी को कमान दी गई है। चौधरी राजस्थान के वरिष्ठ नेता एवं विधायक हैं। जितेंद्र सिंह राजस्थान से थे।

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जितेन्द्र सिंह के प्रभारी रहने के दौरान प्रदेश कांग्रेस का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। इससे पहले 29 में से एक सीट कांग्रेस के पास थी। गुटबाजी, नेताओं की नाराजगी के चलते हाईकमान ने सिंह से मप्र की जिम्मेदारी वापस ले ली। हालांकि सिंह के पास अब भी असम का प्रभार है।

भूपेश बघेल को मिली ये जिम्मेदारी
बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रसे में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है. इसमें सबसे  सबसे अहम फैसला छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को पंजाब का महासचिव नियुक्त करना है. पंजाब में पहले यह जिम्मेदारी देवेंद्र यादव के पास थी. देवेंद्र यादव को कांग्रेस पार्टी ने यह जिम्मेदारी दिसंबर 2023 में सौंपी थी. वहीं, अब यह जिम्मेदारी भूपेश बघेल को मिल गई है. कांग्रेस नेता भूपेश बघेल कई चुनावी राज्यों में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के तौर पर राष्ट्रीय भूमिका निभाते रहे हैं।

मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना का प्रभार

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लंबे अरसे बाद राहुल गांधी की करीबी टीम में रही मीनाक्षी नटराजन को एक बार फिर संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई है। नटराजन को तेलंगाना का प्रभार दिया गया है। तेलंगाना में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है।

युवा चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी देने की कोशिश
पार्टी ने संगठन में प्रभारी में युवा चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी देने की कोशिश की है, सप्तगिरि शंकर उल्का व मीनाक्षी नटराजन का नाम लिया जा सकता है। लेकिन इसमें एक युवा चेहरा कृष्णा अल्लावरु का भी है, जिन्हें पार्टी ने बिहार जैसे हम राज्य की जिम्मेदारी दी है। कृष्णा अल्लावरु इससे पहले पार्टी के दो फ्रंटल संगठन यूथ कांग्रेस व एनएसयूआई के प्रभारी सहसचिव का जिम्मा संभाल चुके हैं।

जबकि लंबे अरसे बाद मोहन प्रकाश, राजीव शुक्ला, दीपक बावरिया, भरत सिंह सोलंकी, अजय कुमार और देवेंद्र यादव को राज्यों के प्रभार से मुक्त किया गया है। यह तमाम नाम ऐसे हैं जो पिछले सालों से अलग-अलग राज्यों का प्रभार संभाल रहे थे। उल्लेखनीय है कि देवेंद्र यादव को चुनाव से न पहले दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप गई है। यादव को हालिया चुनाव में दिल्ली में हार का सामना करना पड़ा था। जबकि अजय कुमार कांग्रेस के टिकट पर झारखंड के जमशेदपुर से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था।

बिहार कृष्णा अलावरु
हरियाणा बीके हरिप्रसाद
तेलंगाना मीनाक्षी नटराजन
हिमाचल प्रदेश,चंडीगढ़ रजनी पाटिल
झारखंड के. राजू
ओडिशा अजय कुमार लल्लू
तमिलनाडु गिरीश
त्रिपुरा, मणिपुर, सिक्किम और नगालैंड सप्तगिरि शंकर


प्रभारी पद से मुक्त
राजीव शुक्ला, मोहन प्रकाश, देवेंद्र यादव, अजय कुमार, दीपक बाबरिया औरभारत सिंह सोलंकी।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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