Congress बोली-एमपी निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट 4 दिन से बंद:प्रेस-कॉन्फ्रेंस के दौरान खुली फिर ठप हुई

भोपाल.लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनावों में वोटों की चोरी का आरोप लगाया है। इसके बाद से कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार चुनाव आयोग और बीजेपी को घेर रही है। आज (बुधवार) को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में एमपी कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक हुई। जिसमें पार्टी के सभी विधायकों और विधानसभा चुनाव में हारे प्रत्याशियों से कहा है कि वे अपने क्षेत्र के दो चुनाव का फर्जी वोटर्स का डेटा दें।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी की बात दोहराई। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस दिन से चुनाव आयोग पर वोटों की चोरी का आरोप लगाया है, उसी दिन से मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट बंद है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ देर खुली और फिर ठप हो गई वेबसाइट
मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट CEOMP के चार दिनों से बंद होने की बात कांग्रेस नेताओं ने कही। इसी दौरान वेबसाइट कुछ मिनट के लिए खुली और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही ठप हो गई। जीतू पटवारी ने कहा कि वेबसाइट बंद होने से साफ पता चलता है कि कहीं न कहीं चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सच्चाई देश के सामने रखी
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सच्चाई देश के सामने रखी। हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का जो हनन हो रहा है, उसके बारे में बताया। कर्नाटक की एक विधानसभा क्षेत्र के सारे तथ्य सामने रखे। जब भी किसी संवैधानिक संस्था के सामने कोई नागरिक कोई बात लाता है तो संस्था की जिम्मेदारी होती है कि वह उन तथ्यों और बातों की जांच करके कार्रवाई करे।
लेकिन इस देश में चुनाव आयोग की निष्पक्षता के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की सरकार ने संविधान पर जो प्रहार किया, तीन सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कमेटी चुनाव आयुक्त का चयन करेगी।
इसे बदलकर प्रधानमंत्री भारत सरकार के नॉमिनी, जो इस चयन में अमित शाह के साथ नेता प्रतिपक्ष को लाया गया, उसी दिन यह सवाल उठाया गया था कि क्या इस परिवर्तन से चुनाव आयोग निष्पक्ष रह पाएगा। जो आशंका थी, आज वह हकीकत बन चुकी है और पूरा देश जान चुका है। राहुल गांधी ने बहुत सामान्य सी मांग, जो हर नागरिक को अधिकार के रूप में मिली है, वही रखी थी कि साफ-सुथरी वोटर लिस्ट संवैधानिक अधिकार क्या आम नागरिक नहीं रखता? एमपी में हम लोग वही मांग दोहरा रहे हैं।
सरकार ने डिजिटल इंडिया के प्रचार में हजारों करोड़ रुपए लगाए
उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्चेबल वोटर लिस्ट की मांग हम लोग कर रहे हैं। इस सरकार ने डिजिटल इंडिया के प्रचार में हजारों करोड़ रुपए लगाए। आज टेक्नोलॉजी के युग में क्या भारत का नागरिक यह अधिकार नहीं रखता कि वह वोटर लिस्ट में अपना या किसी भी मतदाता का नाम देख सके? जो CCTV पोलिंग बूथ पर लगी है, उसे 15 दिन के अंदर डिलीट करना, यह भाजपा की केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इससे भी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। वोटिंग मशीन और मतदाता सूची के डेटा की पारदर्शी ऑडिट से चुनाव आयोग क्यों डरता है?
आज देश के नागरिक का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा
हरीश चौधरी ने कहा कि ये लड़ाई भाजपा, कांग्रेस या नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी की नहीं है। देश की जनता के वोटों की चोरी करने वालों के बीच की लड़ाई है। अगर किस भी नागरिक का वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाता है तो उसके संवैधानिक अधिकार छीना जाता है। जो अधिकार हमें संविधान देता है। उन अधिकारों का हनन चुनाव आयोग कर रहा है। आज देश के नागरिक का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है। यह उसकी लड़ाई है। देश के हर नागरिक को वोटर लिस्ट में अपना नाम खोजने का और वोटर लिस्ट में किसी ने फर्जीवाड़ा किया है तो ये पता लगाने के अधिकार है। आज चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही। ये देश जान चुके है। इस मुद्दे को डायवर्ट करने के लिए शिकायतकर्ता से एफिडेविट मांगा जा रहा है।
अगर बदलाव लाना है तो आपको गुस्सा होना पड़ेगा
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा ने कहा हम और शिव खेरा ने कंट्री फर्स्ट मूवमेंट के लिए लाल परेड ग्राउंड में बड़ी सभा की थी। हम लोग लंबे समय से लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। हम लोग कहते थे कि अगर बदलाव लाना है तो आपको गुस्सा होना पड़ेगा।
जब तक आप गुस्सा नहीं होंगे, कोई बदलाव नहीं आता है। अगर ब्रिटिश साम्राज्य हटा, क्योंकि गांधी जी को गुस्सा आया। जब उनके साथ अफ्रीका में अन्याय हुआ। अब आज अन्याय की व्यवस्था है। उसके खिलाफ राहुल जी को गुस्सा आया। ये गुस्सा इस व्यस्था को बदल कर ही दम लेगा।
2018 का चुनाव हम लोग वोटर लिस्ट पर लड़ाई लड़ रहे थे। चुनाव आयोग के सामने जाकर लड़ाई लड़ी, सुप्रीम कोर्ट तक गए। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान की हमने लड़ाई लड़ी और सिब्बल के साथ हम कोर्ट में थे, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ भी सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। तब हमने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि 43 लाख ऐसे नाम हैं, जो गलत हैं। हम यही अनुरोध कर रहे थे कि अगर प्रजातंत्र में चुनाव कराने हैं तो फेयर वोटर लिस्ट के बिना चुनाव नहीं हो सकते।
विवेक तन्खा बोले- वोटर लिस्ट देश की संपत्ति है
विवेक तन्खा ने कहा कि वोटर लिस्ट देश की संपत्ति है। इलेक्शन कमीशन यह कैसे कह सकता है कि डिलीट किए गए नाम न तो सुप्रीम कोर्ट से शेयर करेंगे, न ही राजनीतिक पार्टी से। चुनाव आयोग एक संवैधानिक रेगुलेटर है। चुनाव को सुपरवाइज करने का अधिकार आयोग को संविधान ने दिया है।
राजनीतिक पार्टियां स्टेकहोल्डर होती हैं, बैलेट की लड़ाई हम लोग लड़ते हैं। अगर हम वोटर लिस्ट की ऐसी कॉपी मांग रहे हैं, जिसे स्कैन करके हम आपको यह बता सकें कि कौन से वोटर संदिग्ध हैं, कौन से फेक हैं या जिनमें जांच की जरूरत है, तो इसमें गलत क्या है? पूर्व चुनाव आयुक्त रावत जी हमारी लिस्ट का स्वागत करते थे।
पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में वोटों की चोरी के मुद्दे पर हुई चर्चा
कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में मुख्य रूप से वोटों की चोरी के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि बीजेपी और इलेक्शन कमीशन अलग-अलग नहीं, दोनों एक ही हैं। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, संजय दत्त मौजूद रहे।





