BJP : क्या मोहन यादव ने कराई हितानंद की रवानगी..?

भोपाल। भाजपा चौंकाने वाले फैसलों के. लिए मानी जाती है, इसी श्रृंखला में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद नंद शर्मा का अचानक से दायित्व परिवर्तन होने से भाजपा के अंदरखाने में तूफान आ गया है। अचानक लिए गये फैसले से जहाँ पार्टी में कहीं खुशी कहीं गम का माहौल है, वहीं इसके पीछे कौन रहा, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैँ।
सूत्रों का दावा है कि हितानंद क़ो प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ही क्लीन बोल्ड किया है। हालांकि कारण बहुत सारे बताये जा रहे हैँ। वैसे पार्टी के अधिकांश लोग यही मानते हैँ कि हितानंद का प्रमोशन हुआ है। असल में हितानंद शर्मा पर पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा के कार्यकाल में ब्राह्मणवाद के आरोप लगे थे। 25 लोगों कि कार्यकारिणी में 11 ब्राह्मण पदाधिकारी शामिल किये गये थे। वर्तमान में उन पर प्रशासनिक कार्यों में ज्यादा हस्तक्षेप करने के आरोप हैँ। कुछ जिलों में कलेक्टर पदस्थ करवाने में भी उनकी भूमिका बताई जा रही है। एक कलेक्टर के साथ रों सम्बन्ध होने की चर्चा तक फ़ैल गई थी।
संगठन के मामलों में हितानंद का एकतरफा रोल हो गया था। वर्तमान अध्यक्ष तो शुरूआती दौर से ही उनके हिसाब से चल रहे थे। रिमोट उन्ही के हाथ में रहा। एक आरोप महिलाओं क़ो लेकर भी रहा। उन्होंने संगठन और सत्ता में कुछ विशेष महिला नेत्रियों की सिफारिश की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए भी एक महिला पदाधिकारी के लिए दिल्ली तक लाबिंग की थी। उनका महिला प्रेम पार्टी के गलियारों में खास चर्चा में रहा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली जा कर हितानंद शर्मा के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी। तब जाकर उन्हें हटाया जा सका।
दरअसल भाजपा में संगठन महामंत्र का पद महत्वपूर्ण माना जाता है जो की सत्ता और संगठन के बीच सेतु का काम करता है चाहे कोई भी फैसला हो संगठन महामंत्री को सिरफारिश पूर्ण मानी जाती है। कृष्णमुरारी भीषे कमान सिंह सोलंकी अरविंद मेनन सुहाष भगत और हितानंद शर्मा ऐसे संगठन महामंत्री रहे हैं जिनके कार्यकाल में भाजपा मुनने से शिखर पर पहुंची पंचायत से पार्लियामेंट तक चुनाव जीत रही है। इस दौरान इस संगठन मंत्रियों की सिफारिश पर ही फैसला किया जाता है। विभिन्न निगम मंडलों में चाते नियुक्तियों का मामला हो चाहे कोई महत्वपूर्ण दाचित्य सौंपा जाना हो संगठन महामंत्री महत्वपूर्ण कड़ी होता है। अभी जो नियुक्तियाँ होनी हैँ, उनके मामले में भी हितानंद का हस्तक्षेप ज्यादा हो रहा था। यही कारण रहा कि मोहन यादव क़ो उनके खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा।





