MP: भोपाल में लंबे समय बाद स्थानीय उम्मीदवारों के बीच होगा मुकाबला..

महापौर रह चुके आलोक
आलोक शर्मा के दादा पंडित नंदकिशोर शर्मा का संगीत घराना था। आलोक महापौर भी रह चुके हैं। वहीं अरुण श्रीवास्तव की माता विमला श्रीवास्तव जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। लोगों का कहना है कि दोनों प्रत्याशियों के स्थानीय होने की वजह से मुकाबला कांटे का है।
अरुण की माताजी रह चुकी हैं जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष
कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण श्रीवास्तव पार्टी की कई जिम्मेदारियां सम्हाल चुके हैं। उनके पिता भी कांग्रेसी थे। माता जी श्रीमती विमला श्रीवास्तव मम्मीजी के नाम से प्रसिद्ध थीं। वे भोपाल जिला और जनपद अध्यक्ष रहीं। ग्रामीण क्षेत्र में उनका खास दखल रहा है। पूरी कमान शुरू से अरुण श्रीवास्तव ने ही सम्हाली, इस कारण इनके पास अच्छा खासा ग्रामीण नेटवर्क है। कायस्थ समाज में भी उनकी अच्छी पैठ है।
1985 में जीते थे केएन प्रधान
1984 में हुआ भोपाल गैस कांड कौन भूल सकता है। इस भीषण त्रासदी की वजह से भोपाल में लोकसभा चुनाव को टाल दिया गया था। जनवरी 1985 में भोपाल में लोकसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भाजपा से लक्ष्मीनारायण शर्मा और कांग्रेस से केएन प्रधान चुनावी मैदान में थे। खास बात यह है कि ये दोनों भोपाल के रहने वाले थे। हालांकि जीत केएन प्रधान को मिली थी।
2014 में स्थानीय उम्मीदवार पर खेला था दांव
इसके बाद 2014 में भाजपा ने आलोक संजर को टिकट दिया था। कांग्रेस से पीसी शर्मा ने चुनाव लड़ा। मगर बाजी आलोक संजर ने मारी। अब 10 साल बाद 2024 के चुनावी समर में कांग्रेस और भाजपा ने स्थानीय प्रत्याशी पर दांव खेला है। पिछले 25 साल में पांच चुनाव में तीन बाहरी नेता यहां से सांसद बन चुके हैं।
कड़ा होगा चुनावी मुकाबला
भोपाल-सीहोर लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 23 लाख है। भोपाल बटुओं और पटिए के लिए प्रसिद्ध है। भोपाल की पटिए से राजनीति शुरू करने वाले राजनेता राष्ट्रपति तक बन चुके हैं। भोपाल की जनता को इस चुनाव में यह खुशी है कि दोनों ही प्रत्याशी भोपाली हैं। ऐसे में यहां चुनावी मुकाबला कड़ा होगा।
1984 केएन प्रधान कांग्रेस
1989 सुशील चंद्र वर्मा भाजपा
1991 सुशील चंद्र वर्मा भाजपा
1996 सुशील चंद्र वर्मा भाजपा
1998 सुशील चंद्र वर्मा भाजपा
1999 उमा भारती भाजपा
2004 कैलाश जोशी भाजपा
2009 कैलाश जोशी भाजपा
2014 आलोक संजर भाजपा
2019 प्रज्ञा सिंह ठाकुर भाजपा