Social media : नहीं मी लार्ड इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच…

देश के मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि सिस्टम पर हमला करने वाले “पैरासाइट” हैं।

उनका कहना है “कॉकरोच जैसे युवा हैं, जिन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती और इस प्रोफेशन में उनकी कोई जगह नहीं है। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया बन जाते हैं, कुछ RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं, कुछ दूसरे एक्टिविस्ट बन जाते हैं, और वे सब पर हमला करना शुरू कर देते हैं।”

CJI का ये कथन न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है अपितु हमारे देश की युवा शक्ति का अपमान भी है। संविधान के रखवाले के रूप में जो व्यक्ति सर्वोच्च पद पर आसीन है उसके श्रीमुख से ऐसे शब्द शर्मिंदा करने वाले हैं।

शायद ऐसा कहते समय वे भूल गए कि किसी भी देश की पूंजी उसकी युवा शक्ति में ही निहित होती है। हमारे प्रधानमंत्री जी ने देश के युवाओं को “विकसित भारत 2047” का केंद्रबिंदु माना है। इसके उलट मुख्य न्यायाधीश ने देश के युवाओं को बुरी तरह अपमानित कर उन्हें परजीवी की संज्ञा दी है।

लेकिन हम CJI को बताना चाहते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति वाले इस देश का युवा परजीवी/कॉकरोच/निठल्ला नहीं है।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

आज़ादी की लड़ाई में अनगिनत युवाओं ने अपना योगदान देकर भरी जवानी में जीवन देश पर न्यौछावर किया है। ऐसा कहते समय क्या आप खुदीराम बोस और भगत सिंह को भूल गए?

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

वो बहुत नाज़ुक उम्र में सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की चौकसी में लगा रहता है।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

इस देश के युवाओं ने ही विश्व को सबसे ज़्यादा IT प्रोफेशनल्स दिए हैं। आज कितने युवा विदेशों में काम करते हुए लाखों करोड़ का रेमिटेंस इस देश को देते हैं।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

जब देश युवाओं के लिए रोज़गार उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है तब युवाओं ने ही ओला, ओयो, फ्लिपकार्ट, Paytm जैसे स्टार्टअप शुरू कर लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए हैं। जिन युवाओं को आपने पैरासाइट और कॉकरोच कहा है उनके दम पर ही ‘स्टार्टअप इंडिया’ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बना है।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच…..

खेलों की दुनिया में धूम मचाने वाले पी वी सिंधु, साइना नेहवाल, नीरज चोपड़ा, धोनी, अभिनव बिंद्रा, विराट कोहली, विनेश फौगाट ये सब युवा खिलाड़ी ही थे जिनके कारण देश का मान बढ़ा।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं के योगदान कम नहीं हैं। हमारे अंतरिक्ष मिशन युवा शक्ति के दम पर ही सफल हुए हैं।

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देश के युवा स्वास्थ्य कर्मियों ने ही कविड जैसे दौर में अपनी जान की परवाह किए बिना इस देश के लाखों नागरिकों की देशभाल कर उनकी जान बचाई है।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच…..
स्किल इंडिया के माध्यम से प्रशिक्षित ये युवा ही आपके घर में प्लंबिंग, फर्नीचर रिपेयरिंग, बिजली से संबंधित कार्य, उपकरण सुधार आदि की सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच…..

रोजगार के अवसर न होने के बावजूद वो अपने दम पर ठेले खोमचे लगाकर, दौड़ते भागते होम डिलीवरी करके, हैंडीक्राफ्ट बेचकर और भी न जाने कितने छोटे मोटे काम करके अपना घर चला रहे हैं।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

वो NSS, NCC, नेहरू युवा केंद्रों और अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से इस देश में समाज कल्याण, मानव सेवा, रक्तदान, स्वच्छ भारत जैसे कार्यों में लगा है।

नहीं CJI साहब इस देश का युवा न तो पैरासाइट है न ही कॉकरोच….

यही वो युवा पीढ़ी है जिसका पहली बार का वोट प्रधानमंत्री जी ने पुलवामा के शहीदों के नाम पर मांगा था।

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हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है…..

जो सड़कों पर हथियार लेकर नंगा नाच करता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो दूसरे धर्मावलंबियों के आराधना स्थलों के सामने नंगी नंगी गालियों से युक्त भजन(?) गाता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो नशे की गिरफ्त में पड़कर अपराध करता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो मुफ्त का राशन खाता है और एक विशेष धर्म के लोगों की लिंचिंग करता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो मासूम बेटियों का बलात्कार करता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग करता है, गंदी गालियां उन स्त्रियों को देता है जिनके वंदन की बात इस देश के हुक्मरान करते हैं।

हां साहब इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो बिना अपने भविष्य का विचार किए वोटिंग मशीन के बटन दबाता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो देश के ज़िम्मेदार पदों पर बैठकर भरी रैलियों में गाली बकता है, गोली मारो….के नारे लगाता है।

हां साहब, इस देश का वो युवा पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो वकालत करते करते अपने पिता के रुतबे या एक विचारधारा विशेष का समर्थक होने के कारण अचानक एक दिन इस देश का न्यायाधीश बन जाता है।

हां साहब, इस देश के हर वो व्यक्ति पैरासाइट है, कॉकरोच है….

जो टैक्स पेयर के पैसे से वेतन लेता है लेकिन इंसाफ नहीं करता। वोटर लिस्ट से नाम कट जाने पर कहता है अगले चुनाव में वोट दे देना। जो वोटर के संवैधानिक अधिकार की रक्षा नहीं कर सकता वो पैरासाइट है।

साहब, सड़े गले सिस्टम से हताश और निराश युवा अगर इसके खिलाफ बोलता है या उस पर हमला करता है तो वो हताश, निराश युवा पैरासाइट और कॉकरोच नहीं बल्कि जागृत चेतना से युक्त है।

कभी आपने सोचा युवाओं को इस हाल तक पिछले कुछ वर्षों में किसने और कैसे पहुंचाया? कौन सा सिस्टम है जो कल के भविष्य को अंधेरी गली में धकेल रहा है वो भी महज़ सत्ता के लालच में? कौन हैं वो पैरासाइट और कॉकरोच जो पढ़ने लिखने की उम्र में युवाओं के हाथ में हथियार दे रहे हैं? कभी उन पैरासाइट्स और कॉकरोचेस के बारे में भी मुंह खोलिए मी लार्ड!

फेसबुक से साभार

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