MP : मुख्य सचिव अनुराग जैन के निशाने पर मैदानी अफसर और उनका भ्रष्टाचार…? आखिर क्यों लिया मुख्यमंत्री और पीएमओ का नाम..?

संजय सक्सेना

क्या मुख्य सचिव अनुराग जैन के निशाने पर मैदानी अफसर और उनका भ्रष्टाचार है…? आखिर उन्होंने मुख्यमंत्री का नाम क्यों लिया ? और, पीएमओ का नाम उनके द्वारा क्यों लिया गया? ये कुछ ऐसे सवाल हैँ जो गत दिवस मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की मैदानी अधिकारियों के साथ कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हुए संवाद के बाद उठाये जा रहे हैँ।

असल में मुख्य सचिव ने 7 और 8 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलेवार समीक्षा की। इसमें टॉप थ्री और बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में महिला सुरक्षा और नाबालिग बालिकाओं की तलाश से जुड़े ‘मुस्कान अभियान’ की भी समीक्षा की गई।

अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर कड़ी नाराजगी जताई । उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई यह न समझे कि सब कुछ छिपा रहता है। किसके यहां क्या पक रहा है? इसकी पूरी जानकारी रहती है। उनका कहना था कि एमपी के हर प्रशासनिक मूवमेंट पर पीएमओ नजर रखता है। कलेक्टर चाहें नवाचार करें या किसी तरह की करप्शन जैसी स्थिति में लिप्त हो, पीएमओ तक इसकी जानकारी पहुंचती है। इतना ही नहीं सीएम भी कलेक्टरों की हर एक्टिविटी की जानकारी रखते हैं। जैन ने कहा-कई बार सीएम कहते हैं कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। इसलिए कलेक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे अपने आचरण संयमित रखें और किसी तरह की शिकायत की स्थिति न आने दें।
मुख्य सचिव ने अफसरों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हित में काम करने की चेतावनी दी। सीएस ने बताया कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं, इसलिए समय रहते सुधार कर लें।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों से कहा कि पीएमओ आपके हर एक्शन की जानकारी रखता है। कलेक्टर जो नवाचार करते हैं, उस नवाचार का इम्पैक्ट कितना है? यह तक जानकारी पीएमओ रखता है। यह बात सीएम को किसी दूसरे स्टेट के सीएम के एडवाइजर ने बताई है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके काम की कितनी मॉनटरिंग होती है।
सीएस यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि आप जो करते हैं, उसे दूसरे राज्यों के लीडर और अफसर भी देखते हैं। वहां से भी फीडबैक आते हैं, जो आपके काम की असलियत उजागर करते हैं। सीएस ने बताया कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं, इसलिए समय रहते सुधार कर लें।

ये बैठक उस समय हो रही थी, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव विदेश दौरे पर हैँ। सीएस के तेवर कुछ ज्यादा ही तीखे नजर आये। कलेक्टरों से सीधे सीधे पैसे लेने और भ्रष्टाचार कि बात कहना सामान्य बात नहीं है। सच बात यही है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच चुका है। और इसकी चर्चा भी हार्दिक तरफ है। ये भी चर्चा है कि बिना पैसे के पोस्टिंग नहीं होती। कलेक्टर एसपी के जिले के हिसाब से पोस्टिंग के रेट तय हैँ, ऐसा कहा जाता है। हर विभाग में तबादलों से लेकर प्रभार तक की रेट लिस्ट है।

ये तो चर्चाओं की बात है, लेकिन जब प्रदेश का प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर एसपी से कॉन्फ्रेंसिंग में भ्रष्टाचार की बात कर रहा हो, तब ये चर्चाएं प्रमाणित सी लगती हैँ। लेकिन एक बड़ा सवाल ये  है कि मुख्य सचिव क़ो ये सब कहने की नौबत आई क्यों? क्यों उन्होंने कहा कि पीएमओ क़ो सब जानकारी है। ये बात केवल अधिकारियों के लिए कही गई, या फिर इशारा कहीं और भी रहा।

यहाँ कुछ और तथ्यों पर गौर करना होगा। पहला तो ये कि अनुराग जैन क़ो मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति के बिना एमपी का मुख्य सचिव बनाया गया था। इसके बाद उन्हें एक्सटेंशन भी सीएम की अनिच्छा के बावजूद दिया गया। फिर, प्रशासन में सीएम और सीएस के बीच कई बार टकराव की चर्चा भी सामने आई। पिछले दिनों जब सीएम यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तब अनुराग जैन की अनुपस्थिति के बारे में पूछने पर कहा था कि वो बहुत टेढ़े व्यक्ति हैँ। उपस्थिति पर ऐसे जवाब से मीडिया के लोग स्तब्ध रह गये। लेकिन इससे सीएम और सीएस के बीच सम्बन्ध के बारे में जानकारी सार्वजानिक अवश्य हो गई। अब सीएस की कॉन्फ्रेंस चर्चाओं में है।


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