Vishleshan : अजित पवार द्वारा चाचा की तारीफ… यूं ही नहीं…?
लोकसभा चुनाव खत्म होते ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की हलचल शुरू हो गई है। सभी राजनीति दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया है। लेकिन इसके साथ ही लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र के नतीजों को लेकर कहीं न कहीं एनडीए के घटक दलों के चेहरों पर चिंता की रेखाएं उभरने लगी हैं। लोकसभा चुनाव में जिस तरह से महाविकास अघाड़ी यानि कांग्रेस, उद्धव शिवसेना और एनसीपी शरद पवार के पक्ष में बेहतर परिणाम आए, आगामी विधानसभा चुनाव में भी इनकी सरकार बनने की संभावना फिर से बढ़ गई है। और यही कारण रहा कि जहां शिंदे गुट के तमाम विधायक कथित तौर पर उद्धव के संपर्क में आ गए हैं, वहीं अजित पवार के तेवर भी बदले-बदले दिखने लगे हैं।
सोमवार को अजित पवार और शरद पवार की एनसीपी ने पार्टी के स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों को चुनाव में लग जाने के लिए कहा। वहीं, उद्धव सेना और शिंदे सेना ने अपनी पार्टी के सांसदों, विधायकों की बैठक बुलाकर विधानसभा की तैयारी में जुटने के लिए कहा है। इधर सीटों को लेकर भी खींचतान शुरू हो गई है। अजित पवार की एनसीपी ने विधानसभा की 80 सीटों पर दावा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने सीधे-सीधे 80 सीटों की मांग तो नहीं कि लेकिन यह ज़रूर कहा कि पार्टी को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बराबर सीटें मिलनी चाहिए। पवार की पार्टी के मंत्री अनिल पाटील ने विधानसभा चुनाव में 80 सीटों की मांग की है। उन्होंने जलगांव, धुले सहित अन्य जिले की सीटों पर दावा किया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी के अध्यक्ष अजित पवार ने तो सबको चौंका ही दिया। उन्होंने पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में अपने चाचा और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शरद पवार की अप्रत्याशित रूप से प्रशंसा की। उन्होंने शरद पवार को अपना मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अजित ने कहा, शरद पवार ने 25 साल पहले कांग्रेस की सोनिया गांधी की राष्ट्रीयता को लेकर एनसीपी की स्थापना की थी। मैं पार्टी का नेतृत्व करने और संगठन को शक्तिशाली नेतृत्व प्रदान करने के लिए उनका आभारी हूं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह एनडीए का हिस्सा हैं, लेकिन उनकी विचारधारा अलग है। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी को लोकसभा चुनाव में खराब रिजल्ट का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं मोदी कैबिनेट में उनकी पार्टी को प्राथमिकता भी नहीं मिली है। अब उनके बदले रुख से कई अटकलें शुरू हो गई हैं।
जून 2023 में अपने चाचा से अलग होने के बाद अजीत पवार का पवार सीनियर की प्रशंसा में यह पहला बयान है। यह बयान लोकसभा चुनाव के नतीजों के कुछ दिनों बाद आया है। लोकसभा चुनाव में शरद पवार की एनसीपी ने 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और आठ सीटें जीती हैं। अजीत की पार्टी ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था और सिर्फ एक पर जीत हासिल की। अजित ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने सफाई दी कि एनसीपी ने नई एनडीए सरकार में स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री का पद क्यों स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, हमारा तर्क है कि प्रफुल्ल पटेल लंबे समय तक यूपीए सरकार में कैबिनेट सदस्य थे, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। हमने भाजपा नेतृत्व को सूचित किया है। हम कुछ समय तक इंतजार करेंगे और एनडीए के साथ बने रहेंगे। 15 अगस्त से पहले राज्यसभा में हमारी ताकत एक से बढक़र तीन हो जाएगी।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वर्षा निवास स्थान पर पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद और विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में लोकसभा चुनाव में मिली हार के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री शिंदे ने पार्टी के नेताओं, सांसद और विधायकों को हिदायत दी है कि लोकसभा चुनाव में भले ही हार मिली हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में किसी भी हालत में पार्टी को जीत मिलनी चाहिए। अगर विधानसभा में अच्छा परफॉर्मेंस देना है, तो चुनाव के लिए आज से लगना पड़ेगा।
शिंदे ने अपने विधायकों को साफ संकेत दिए कि यदि परफार्मेंस बेहतर नहीं होगा तो टिकट नहीं मिलेगा। शिंदे के पास भी खबर है कि उनके कुछ विधायक उद्धव ठाकरे के संपर्क में हैं। इन्हें अपना टिकट कटने की आशंका भले ही न हो, लेकिन आगामी चुनाव में हार की चिंता ज्यादा सता रही है। महाराष्ट्र में एनडीए के खिलाफ जनादेश ने केवल शिंदे और अजित पवार को ही नहीं भाजपा को भी चिंता में डाल दिया है। यही कारण है कि महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पार्टियों के टूटने की संभावनाओं को बल मिल रहा है।
इस बार वैसे भी भाजपा की ताकत कम हो गई है और केंद्र की एनडीए सरकार टीडीपी एवं जदयू के सहारे चलेगी, इसलिए भले ही सरकार के गिरने के चांस इतने नहीं हों, पर सरकार बिना डगमगाए चलती रहेगी, इसे लेकर संदेह ही व्यक्त किया जा रहा है। महाराष्ट्र के नतीजे यदि लोकसभा चुनाव जैसे ही रहे, तो केंद्र में भी समीकरण बदल सकते हैं, ऐसा राजनीतिक पंडितों का मानना है।
– संजय सक्सेना



