Editorial
अब नया कानून…!

देश में एंटी-पेपर लीक कानून यानी पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट, 2024 लागू हो गया है। केंद्र ने कल आधी रात इसका नोटिफिकेशन जारी किया। यह कानून भर्ती परीक्षाओं में नकल और अन्य गड़बडिय़ां रोकने के लिए लाया गया है। इस कानून के तहत, पेपर लीक करने या आंसर शीट के साथ छेड़छाड़ करने पर कम से कम 3 साल जेल की सजा होगी। इसे 10 लाख तक के जुर्माने के साथ 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है।
परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त सर्विस प्रोवाइडर अगर दोषी होता है तो उस पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना होगा। सर्विस प्रोवाइडर अवैध गतिविधियों में शामिल है, तो उससे परीक्षा की लागत वसूली जाएगी।
असल में नीट और यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाओं में गड़बडिय़ों के बीच यह कानून लाने का फैसला बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पहले, केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के पास परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए अलग से कोई ठोस कानून नहीं था। यह कानून किसी भी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संस्थानों द्वारा प्रश्न पत्र या आंसर की लीक करना, सरकारी परीक्षा में किसी भी उम्मीदवार की किसी भी तरीके से अनधिकृत रूप से सहायता करना और कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करना जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान करता है।
इनके अलावा धोखाधड़ी या पैसा कमाने के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना, नकली परीक्षा आयोजित करना, धोखाधड़ी या पैसा कमाने के लिए फर्जी प्रवेश पत्र या नियुक्ति पत्र जारी करना और परीक्षाओं में अनुचित साधनों को अपनाने की सुविधा के लिए बैठने की व्यवस्था, उम्मीदवारों के लिए तिथियों और पालियों के आवंटन में हेरफेर भी इस कानून के तहत दंडनीय अपराधों में शामिल हैं।
अधिनियम में कहा गया है- कोई भी व्यक्ति या व्यक्ति जो अनुचित साधनों का सहारा लेता है और इस अधिनियम के तहत अपराध करता है, उसे कम से कम तीन साल की कैद की सजा दी जाएगी, जो पांच साल तक बढ़ सकती है और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अधिनियम के अनुसार, परीक्षा के संचालन के लिए सरकारी परीक्षा प्राधिकरण से नियुक्त सर्विस प्रोवाइडर को भी 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने के साथ दंडित किया जा सकता है और परीक्षा की आनुपातिक लागत भी उससे वसूल की जाएगी। ऐसे सर्विस प्रोवाइडर्स को चार साल की अवधि के लिए किसी भी सरकारी परीक्षा के संचालन के लिए किसी भी जिम्मेदारी सौंपे जाने से भी रोक दिया जाएगा।
यह अधिनियम सेवा प्रदाता को किसी भी एजेंसी, संगठन, निकाय, व्यक्तियों के संघ, व्यावसायिक इकाई, कंपनी, साझेदारी या एकल स्वामित्व वाली फर्म के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें उसके सहयोगी, सह-ठेकेदार और किसी भी कंप्यूटर संसाधन या किसी भी सामग्री के समर्थन प्रदाता शामिल हैं, चाहे उसका कोई भी नाम हो, जिसे सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किया जाता है।
चूंकि सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार 21 जून, 2024 को उस तारीख के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे, इसलिए उससे पहले के मामलों पर यह कानून लागू नहीं हो सकता। यानि हाल में जो नीट और यूजीसी नेट के घोटाले सामने आए हैं, कहा जा रहा है कि उन पर ये कानून लागू नहीं होगा। दरअसल, संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था कहती है कि कोई भी कानून पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है, बशर्ते उसकी प्रकृत्ति वैसी ही नहीं हो और ऐसा प्रावधान कानून में ही नहीं कर दिया गया हो।
देश में कानून बनने से ही अपराध रुक जाते हैं, ऐसा कम ही होता है। फिर भी कानून बनने से लोग थोड़ा बहुत तो भय खाते हैं। इसलिए ऐसा माना जा सकता है कि इस कानून के बनने से पेपर लीक या ऐसी परीक्षाओं के घोटालों में कमी आ सकती है। वैसे देखने में यह भी आता है कि कानून बनने के बाद भी उसका दुरुपयोग करने की प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है। अपराध करने वाला उसकी तोड़ निकालने में लग जाता है। इसके साथ ही सबसे बड़ी समस्या इस देश में यह है कि जिसे सत्ता से संरक्षण मिलने की उम्मीद होती है, वो कानून का उल्लंघन करने से नहीं डरता।
यही नहीं इस समय शासन, प्रशासन और धनबल के गठबंधन के चलते देश में अपराध करने वालों की नई पीढ़ी पैदा हो गई है। ये किसी कानून से नहीं डरते। कई बार तो ऐसा भी देखा गया है कि अपराधी पर संबंधित कानून की धाराएं ही नहीं लगाई जातीं। या असल अपराधी को कानून के दायरे से पहले ही बाहर कर दिया जाता है। व्यापमं कांड इसका प्रमाण है। फिर भी उम्मीद तो करनी ही पड़ेगी कि नया कानून आने से परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी कम हो जाएगी और प्रतिभाशाली बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से बच सकेगा। 
– संजय सक्सेना

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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