Amit Shah ने सनातन पर बयान दे कर योगी पर साधा निशाना…?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सनातन धर्म और उसकी परंपराओं को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। गुजरात के गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करती है, वह देश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकती। उनके इस बयान को आने वाले राजनीतिक हालात और सांस्कृतिक विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है।

ये क्या…? क्या अमित शाह ने योगी आदित्य नाथ पर निशाना साधा है..?

पिछले दस दिनों से प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान विवाद  क़ो लेकर देश भर में हल्ला हो रहा है, लेकिन  अभी तक मुख्यमंत्री योगी का क़ोई बयान नहीं आया, न ही उन्होंने इसके लिए पहल की. और तो और प्रशासन की तरफ से भी क़ोई पहल नहीं हुईं, उलटे शंकराचार्य के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। यूपी से लेकर पूरे भारत में सनातन अनुयायी आंदोलित हैँ, बीजेपी के अंदर भी हलचल है, पर ज्यादा लोग मुखर नहीं हो पा रहे हैँ। दूसरी ओर भाजपा के दरबारी और चाटुकार लोग शंकराचार्य के ही विरोध में बोलने लगे हैँ।

अब अमित शाह का जो बयान आया है, उसके पहले से भाजपा के अंदर खाने से ही आवाज आने लगी थी कि प्रशासन से ये काम ऊपर से करवाया गया है, क्योंकि शाह योगी क़ो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैँ। उन्होंने मौर्य क़ो भी उनके खिलाफ लगा रखा है। प्रयागराज कि घटना क़ो भाजपा जितना हलके में ले रही है, उतना है नहीं.इसकी प्रतिक्रिया बहुत व्यापक हो रही है और ये पूरा मामला भाजपा क़ो भारी पद सकता है।

अमित शाह कि बात करें तो वे सनातन क़ो लेकर तो बयान दे रहे हैँ पर प्रयागराज क़ो लेकर उनका क़ोई बयान नहीं आया। जिन शंकराचार्य के प्रधानमंत्री मोदी के पाँव छुए थे, शाह सनातन पर बोलते हैँ, शांकराचार्य पर नहीं. आज का उनका बयान योगी पर सीधे जा कर लगता है, तो क्या शाह यू पी की अपनी ही सरकार गिराना चाह रहे हैँ या योगी पर इस्तीफे का दबाव बना रहे हैँ? कुछ तो  परदेदारी है।

बात तो दूर तलक जा चुकी है, अब नतीजे की बारी है। सनातन की पैरवी ही नहीं, इसी पर वोट कबाड़ने और राजनीति करने वाली भाजपा के राज में एक शंकराचार्य का अपमान हो जाये…? तीनों शंकराचार्य चौथे के समर्थन में आ जाएं, फिर भी सरकार उनके खिलाफ खड़ी रहे, माफ़ी मांगने के बजाय चमचे चाटुकार साधुओं के माध्यम से समर्थन पाने की कोशिश करे…। ये तो हद से भी आगे कुछ होता है, वो है।

एक बात ये साफ होती जा रही है कि भाजपा सनातन या हिंदूवादी नहीं, समाज क़ो बाँटने पर उतर आई है. किसी भी तरह जीतने का फलसफा उसे आ गया है. पूरा सिस्टम कब्जे में कर लिया है. जिसे चाहे धर्म गुरु बना दे, जिसे माने वही शंकराचार्य…! क्या हिन्दू मानसिक गुलाम हो गये हैं? वैसे बात शाह की हो रही है, जिन्होंने बीजेपी क़ो अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया है। उन्होंने फिलहाल सनातन पर बयान दे कर योगी पर. निशाना साध दिया है, अब बारी योगी की है. पहले मणिकर्णका, फिर शंकराचार्य…! अब एक और बड़ा मुद्दा आ गया है, यूजीसी का। क्या सब दबा दिए जायेंगे? आवाजों क़ो  बंद कर दिया  जायेगा? युवाओं के बढ़ते आंदोलनों क़ो कुचला जायेगा..? देखते हैँ…।

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