SIR पर काम करना भारी पड़ा : बंगाल में एक्टिविस्टों और शोधकर्ताओं के ठिकानों पर एनआईए की छापेमारी

कोलकाता। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल में अधिकारों के लिए काम करने वाले तीन एक्टिविस्टों और शोधकर्ताओं से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 2022 में झारखंड के रांची में दर्ज एक यूएपीए मामले के सिलसिले में की गई, जिसे जांच एजेंसी कथित तौर पर पूर्वी भारत में माओवादी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों से जुड़ा मान रही है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी ली गई। छापेमारी की जद में आईं झेलम रॉय, छात्र संगठन आरएसएफ के महासचिव तथागत रॉय चौधरी और नादिया जिले के सरकारी स्कूल शिक्षक तथा किसान संगठन संग्रामी कृषक मंच से जुड़े सुकुमार कयाल शामिल हैं।
झेलम रॉय हाल के दिनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ आयोजित आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। वहीं, तथागत रॉय चौधरी छात्र राजनीति और विभिन्न जन आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। सुकुमार कयाल किसानों से जुड़े संगठनों के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित मामलों के विरोध में चल रहे अभियानों से जुड़े बताए जाते हैं।
कार्यकर्ताओं का दावा है कि तलाशी अभियान के दौरान मुख्य रूप से पुस्तकों, पत्रिकाओं, पर्चों, कानूनी दस्तावेजों और रसीद पुस्तिकाओं को जब्त किया गया। उनके अनुसार जब्त की गई अधिकांश सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी और किसी प्रकार से प्रतिबंधित नहीं थी। बताया गया है कि तथागत रॉय चौधरी के आवास से कुछ पत्रिकाएं, एसआईआर-एनआरसी से संबंधित पर्चे तथा मामले से जुड़े न्यायिक दस्तावेज जब्त किए गए। वहीं झेलम रॉय ने आरोप लगाया कि राजनीतिक बंदियों के समर्थन में चंदा जुटाने से संबंधित रसीद बुक और कुछ पुस्तकें भी कब्जे में ली गईं।
तथागत रॉय चौधरी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक असहमति को दबाने का प्रयास बताया। उनका कहना है कि मानवाधिकार और जन आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी ओर, एनआईए की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। हालांकि, जांच एजेंसी की कार्रवाई आधिकारिक रूप से 2022 के रांची यूएपीए मामले से जुड़ी बताई जा रही है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने तक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।

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