Hormuj में फंसा भारतीय जहाज, कप्तान ने संदेश भेजकर लगाई मदद की गुहार.. कुल 24 जहाज फंसे हैँ..!

नई दिल्ली। ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट के पास कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिसका शिकार भारतीय जहाज भी हुआ। इस जहाज में 34 सदस्यीय चालक दल है और यह 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) लेकर आ रहा था।
जहाज के कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा और उनके क्रू मेंबर मदद के लिए लगातार भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। बता दें कि यह टैंकर कुवैत के मीना अल अहमदी बंदरगाह से गुजरात के दीनदयाल कांडला बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था। लेकिन 28 फरवरी से इस समुद्री मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पास मीना साकर बंदरगाह क्षेत्र में लंगर डाले खड़ा है और आगे बढऩे की बारी का इंतजार कर रहा है।
जहाज से भेजे गए संदेश में कप्तान वीरेंद्र ने बताया कि मिसाइलें और ड्रोन सीधे हमारे ऊपर उड़ रहे हैं। हर जगह सायरन बज रहे हैं और हर पल ऐसा लगता है जैसे कुछ भयानक हो सकता है। हम बस भारतीय नौसेना का सुरक्षा दल का इंतजार कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित अपने वतन लौट सकें।
जहाज में केवल 60 दिनों का राशन बचा है। शिपिंग कंपनी त्रश्वस्ष्टह्र और संबंधित मंत्रालय लगातार भारतीय नौसेना के संपर्क में हैं। कप्तान और उनके परिवार की एक ही मांग है कि भारतीय नौसेना उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित घर वापस लाए।
भारतीय झंडे वाले करीब 24 जहाज फंसे
पश्चिम एशिया में संकट के बीच भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास फंसे भारतीय झंडे वाले करीब 24 कमर्शियल जहाजों को निकालने के लिए ईरान के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। इन जहाजों पर करीब 900 भारतीय क्रू मेंबर सवार हैं। पिछले कुछ दिनों से ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है।
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पिछले चार से पांच दिनों में किसी भी भारतीय झंडे वाले व्यापारिक टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत नहीं दी है। ये बातचीत हाल के हफ्तों में फारस की खाड़ी में टैंकरों और बड़े मालवाहक जहाजों पर हुए लगातार हमलों के बाद हो रही है। अब तक तीन भारतीय मरीन मारे जा चुके हैं, एक अन्य के लापता होने की खबर है, और कई अन्य अलग-अलग समुद्री घटनाओं में घायल हुए हैं।
विदेश मंत्री ईरान से 3 बार कर चुके वार्ता
माना जाता है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच हाल की कूटनीतिक बातचीत में जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फरवरी के अंत में संघर्ष बढ़ने के बाद से अपने ईरानी समकक्ष के साथ तीन बार बातचीत की है, जिसमें 10 मार्च को हुई एक बातचीत भी शामिल है, जिसमें विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की गई थी।
जहाजों की सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा
इस बातचीत की पुष्टि करते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रियों ने जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित चिंताओं पर चर्चा की, और साथ ही यह भी कहा कि इस बारे में और अधिक विवरण साझा करना अभी जल्दबाजी होगी।







