CBI के निशाने पर विजिलेंस के अफसर, रीडर OP राणा और बिचौलिए बाप-बेटे से पूछताछ में खुलेंगे राज, रिमांड बढ़ा

चंडीगढ़। पंजाब में सामने आए 13 लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी के मामले में जांच अब सिर्फ ट्रैप केस तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसी सीबीआई को डीजीपी विजिलेंस के रीडर रहे इंस्पेक्टर ओपी राणा के मोबाइल फोन से ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर पंजाब विजिलेंस के कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
सीबीआई ने सोमवार को ओपी राणा, कथित बिचौलिये राघव गोयल और अंकित वाधवा को अदालत में पेश किया। एजेंसी की मांग पर अदालत ने तीनों का पुलिस रिमांड पांच दिन और बढ़ाते हुए 12 जून तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया।
दूसरे मोबाइल की तलाश
सीबीआई के अनुसार पूछताछ में पता चला है कि ओपी राणा एक अन्य मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल करता था, जो अभी बरामद नहीं हुआ है। एजेंसी का मानना है कि उस फोन में कथित रिश्वत मांगने और लेने, शिकायतों से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा सह-आरोपितों के साथ बातचीत के महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं।
आमने-सामने पूछताछ से खुलेंगे राज
जांच के दौरान सामने आई नई जानकारियों का संबंध तीनों आरोपितों से जुड़ा होने के कारण सीबीआई उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना चाहती है। एजेंसी का उद्देश्य कथित साजिश, बैठकों, इलेक्ट्रॉनिक संचार और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना है।
संगठित नेटवर्क होने का संदेह
सीबीआई के वकील ने अदालत में कहा कि यह मामला केवल रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का नहीं है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि विजिलेंस विभाग में दर्ज शिकायतों की गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर शिकायतकर्ताओं और आरोपित व्यक्तियों से अवैध वसूली की जाती थी। इससे एक बड़े संगठित नेटवर्क या रैकेट की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक ओपी राणा लंबे समय तक पंजाब विजिलेंस में रीडर के पद पर तैनात रहा है। सीबीआई अब उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिनके साथ वह विभिन्न कार्यकालों में काम कर चुका है।
मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के साथ मामले का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।





